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18 अक्टू. 2026•
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न्यायालय से सजा, फिर भी स्कूल में ड्यूटी! तखतपुर में दोषी शिक्षक पर 24 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

न्यायालय से सजा, फिर भी स्कूल में ड्यूटी! तखतपुर में दोषी शिक्षक पर 24 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

✍️ रिपोर्टर: Pankaj sahu 🗓 18 अक्टू. 2026, 12:08 AM 👁 16
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर में महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी ठहराए गए शिक्षक विवेक गुप्ता पर 24 दिन बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। न्यायालय ने 26 सितंबर 2026 को उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद शिक्षक के स्कूल में कार्यरत रहने की जानकारी सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि उन्हें सजा की जानकारी नहीं थी और मामले की जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

तखतपुर, बिलासपुर | छत्तीसगढ़ | Need24 News
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में न्यायालय से दोषी ठहराए जाने के बावजूद एक शिक्षक के खिलाफ 24 दिन बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित शिक्षक स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहा था।
26 सितंबर को न्यायालय ने सुनाई थी सजा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तखतपुर न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋचा यादव की अदालत ने शिक्षक विवेक गुप्ता को 26 सितंबर 2026 को दोषी ठहराया था।
न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, धारा 323 के तहत भी 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान बताया गया है।
वर्ष 2018 की घटना से जुड़ा है मामला
अभियोजन के अनुसार, घटना 17 फरवरी 2018 को शासकीय प्राथमिक शाला चनाडोंगरी में हुई थी। महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, गाली-गलौज की और विरोध करने पर मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं। न्यायालय ने पीड़िता की गवाही, अन्य गवाहों के बयान और चिकित्सकीय साक्ष्यों पर विचार करने के बाद छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप प्रमाणित पाए। अन्य कुछ आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर शिक्षक को दोषमुक्त किया गया।
सजा के बाद भी स्कूल में कार्यरत रहने की जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित शिक्षक बिलमुंडी स्कूल में कार्यरत था। स्कूल के प्रधान पाठक ने बताया कि शिक्षक 16 अक्टूबर को भी स्कूल में उपस्थित था और उसने न्यायालय से मिली सजा की जानकारी उन्हें नहीं दी थी।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायालय से दोषसिद्धि के बाद संबंधित सरकारी कर्मचारी के विरुद्ध सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पांडेय के अनुसार, उन्हें शिक्षक को सजा मिलने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि न्यायालय का आदेश विभाग तक नहीं पहुंचने के संबंध में जानकारी ली जाएगी और मामले को प्राथमिकता देते हुए कार्रवाई की जाएगी।
अब विभागीय कार्रवाई पर नजर न्यायालय से दोषसिद्धि और विभागीय कार्रवाई दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। संबंधित सेवा नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी को मामले के तथ्यों, न्यायालय के आदेश और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेना होगा।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिक्षा विभाग न्यायालय के फैसले पर क्या कदम उठाता है और संबंधित शिक्षक के विरुद्ध विभागीय प्रक्रिया कब पूरी होती है।
रिपोर्टर: पंकज साहू
Citizen Reporter | Need24 News
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