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नवादा के मेसकौर प्रखंड में मनरेगा के फर्जी कार्य की पुष्टि के बाद भी दो महीने से कोई कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों ने की सरकार से मांग
नवादा के मेसकौर प्रखंड में मनरेगा योजना में फर्जी कार्य की पुष्टि के बाद भी ढाई महीने से कोई कार्रवाई नहीं हुई, ग्रामीणों ने अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए तत्क्षण कार्रवाई की मांग की।
नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड की तेतरिया पंचायत में स्थित सेखावारा कोयली आहर सफाई योजना से जुड़ी मनरेगा योजना में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की शिकायत पर उप विकास आयुक्त ने जांच की जिम्मेदारी सहायक परियोजना पदाधिकारी संजय कुमार सिन्हा को सौंपी।
जांच के बाद संजय कुमार सिन्हा ने योजना में फर्जी कार्य किए जाने की पुष्टि की और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की। उन्होंने 11 अगस्त 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन उप विकास आयुक्त को सौंप दिया।
परंतु प्रतिवेदन सौंपे लगभग ढाई महीने बीत जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में संदेह गहरा गया। उन्होंने कहा कि जांच में गड़बड़ी की पुष्टि और कार्रवाई की सिफारिश होने के बाद भी जिम्मेदारों के विरुद्ध कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन कर मनरेगा योजना में कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई में देरी से मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो सकती है।
अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई कब होगी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी। वे आशा करते हैं कि प्रशासन निष्पक्ष रूप से मामले को सुलझाएगा और योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।
जांच के बाद संजय कुमार सिन्हा ने योजना में फर्जी कार्य किए जाने की पुष्टि की और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा की। उन्होंने 11 अगस्त 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन उप विकास आयुक्त को सौंप दिया।
परंतु प्रतिवेदन सौंपे लगभग ढाई महीने बीत जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में संदेह गहरा गया। उन्होंने कहा कि जांच में गड़बड़ी की पुष्टि और कार्रवाई की सिफारिश होने के बाद भी जिम्मेदारों के विरुद्ध कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन कर मनरेगा योजना में कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई में देरी से मामला ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश हो सकती है।
अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई कब होगी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के मामले में जवाबदेही किसकी तय होगी। वे आशा करते हैं कि प्रशासन निष्पक्ष रूप से मामले को सुलझाएगा और योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।