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28 Oct 2026•
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नवादा जिला मूल्यांकन समिति ने भूमि वर्गीकरण व न्यूनतम मूल्यांकन दरों में प्रमुख बदलाव तय किए

✍️ Reporter: Ramlakhan Kumar 🗓 28 Oct 2026, 06:22 AM 👁 22
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नवादा में आयोजित जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में ग्रामीण, पेरिफेरल और शहरी क्षेत्रों के लिए नई भूमि श्रेणियां और न्यूनतम मूल्यांकन दरों में 1.6‑गुना तथा 2‑गुना वृद्धि का निर्णय लिया गया।

27 अक्टूबर 2026 को नवादा जिले में जिला मूल्यांकन समिति ने भूमि रजिस्ट्री और न्यूनतम मूल्यांकन दरों के पुनरावलोकन हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिये। जिला पदाधिकारी श्री रवि प्रकाश के अध्यक्षत्व में आयोजित बैठक में ग्रामीण, पेरिफेरल और शहरी क्षेत्रों के लिए वर्गीकरण, दरों का समायोजन तथा शहरी क्षेत्र में सम्मिलित मौजों की नई श्रेणियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की अधिसूचना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की न्यूनतम मूल्यांकन दरों में 1.6 गुना तथा शहरी एवं पेरिफेरल क्षेत्रों की दरों में 2 गुना की एकमुश्त वृद्धि की गई। यह कदम राज्य भर में भूमि वर्गीकरण को एकरूप बनाने तथा रजिस्ट्री के समय उचित मूल्यांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।

बैठक में ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्रों के लिए व्यावसायिक, औद्योगिक, आवासीय, उच्च मार्ग किनारे, सिंचित, असिंचित तथा अनुपजाऊ भूमि की श्रेणियां निर्धारित की गईं। अनुपजाऊ भूमि में बलुआही, पथरीली, दियारा और चंवर भूमि शामिल हैं। शहरी एवं मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों में प्रधान सड़क, मुख्य सड़क, शाखा सड़क आदि के आधार पर व्यावसायिक, आवासीय, औद्योगिक तथा कृषि/गैर‑आवासीय भूमि की नई वर्गीकरण व्यवस्था बनाई गई।

छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री के संबंध में निर्णय लिया गया कि 10 डिसमिल तक की जमीन को यदि आवासीय श्रेणी से नीचे की श्रेणी में दिखाया गया तो निबंधन से पहले स्थल जांच अनिवार्य होगी। पेरिफेरल क्षेत्र में समान आकार की भूमि को केवल सिंचित श्रेणी से उच्चतर श्रेणी में ही निबंधित किया जाएगा। साथ ही, यदि किसी भूखंड की सीमा में दो या अधिक सड़कें हों तो उसका मूल्यांकन उच्चतम वर्गीकरण वाली सड़क के आधार पर किया जाएगा।

समिति ने ग्रामीण एवं पेरिफेरल क्षेत्रों से शहरी क्षेत्र में उत्क्रमित मौजों के लिए प्रति खेसरा 20 डिसमिल (नवादा शहरी) तथा 12 डिसमिल (वारिसलीगंज, हिसुआ, रजौली) से अधिक भूमि को कृषि/गैर‑आवासीय श्रेणी में निबंधित करने का प्रावधान भी अपनाया। इन सभी उपायों का मुख्य उद्देश्य राजस्व क्षति को रोकना और भूमि मूल्यांकन को वास्तविक स्थिति के अनुरूप बनाना है।
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