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02 अक्टू. 2026•
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अपराध

निर्दोष भाई को थाने में बंधक बनाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार, ₹40,000 मुआवजे का आदेश

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 02 अक्टू. 2026, 09:12 AM 👁 13
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आपराधिक मामले में फरार आरोपी को सरेंडर कराने के लिए उसके निर्दोष भाई को चार दिनों तक गैरकानूनी तरीके से थाने में बैठाए रखने पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पीड़ित युवक को ₹40,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

आपराधिक मामले में फरार चल रहे एक आरोपी को सरेंडर कराने के लिए उसके निर्दोष भाई को चार दिनों तक गैरकानूनी तरीके से थाने में बैठाए रखने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पीड़ित युवक को 40,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि इस राशि की भरपाई सीधे तौर पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन से की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पुलिसकर्मियों के आचरण पर अपनी नाराजगी को उनकी सेवा पंजिका (सर्विस रिकॉर्ड) में दर्ज करने का भी निर्देश दिया है।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। 9 सितंबर को दिए अपने आदेश में पीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी वास्तविक आरोपी को पकड़ने या उस पर दबाव बनाने के लिए उसके परिवार के ऐसे निर्दोष सदस्यों को बंधक नहीं बना सकतीं, जिनका कथित अपराध से कोई सरोकार नहीं है। अदालत ने रेखांकित किया कि नागरिक स्वतंत्रता का गैरकानूनी हनन चाहे कुछ ही समय के लिए क्यों न हो, पीड़ित आर्थिक मुआवजे का पूरा हकदार है।

यह पूरा मामला तब अदालत के सामने आया जब गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि एसएचओ के निर्देश पर पुलिस टीम 23 जून को पीड़ित के घर गई थी और उसे पूछताछ के नाम पर थाने लाया गया था। दरअसल, पुलिस उसके भाई की तलाश कर रही थी, जिसके खिलाफ पहले कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था और बाद में उसमें दंगा भड़काने व हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं जोड़ दी गई थीं।

पुलिस का तर्क था कि मुख्य आरोपी फरार था, इसलिए उसके भाई से पूछताछ की जा रही थी। हालांकि अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की उस आपराधिक मामले में कोई भूमिका नहीं थी और उसे सिर्फ इसलिए अवैध रूप से रोके रखा गया ताकि उसका भाई पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो जाए। रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी भाई को बाद में 3 अगस्त को अग्रिम जमानत भी मिल गई थी।
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