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नूंह में बिजली कर्मचारियों ने फूंके पुतले, 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल की घोषणा
हरियाणा में इलेवन पावर को पैरलल लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में नूंह डिविजन के बिजली कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है।
हरियाणा में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर लिमिटेड को पैरलल लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में नूंह डिविजन के बिजली कर्मचारियों ने सड़कों पर प्रदर्शन किया। संयुक्त संघर्ष मोर्चा बिजली बोर्ड के आह्वान पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर पैदल मार्च निकाला और नूंह बाईपास पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और एचईआरसी चेयरमैन के पुतले फूंके। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने और बिजली व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में आवाज उठाई।
कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले आश्वासन देकर हड़ताल स्थगित करवाई थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बजाय नूंह और गुरुग्राम में निजी कंपनी को लाइसेंस दे दिया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैली है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निजी लाइसेंस रद्द नहीं किया गया और बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है।
कर्मचारियों का मानना है कि निजी कंपनियों के आने से भविष्य में बिजली महंगी होने की आशंका है, जिसका असर गरीब परिवारों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है।
कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले आश्वासन देकर हड़ताल स्थगित करवाई थी, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बजाय नूंह और गुरुग्राम में निजी कंपनी को लाइसेंस दे दिया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी फैली है।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22, 23 और 24 अक्टूबर को तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निजी लाइसेंस रद्द नहीं किया गया और बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है।
कर्मचारियों का मानना है कि निजी कंपनियों के आने से भविष्य में बिजली महंगी होने की आशंका है, जिसका असर गरीब परिवारों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होता है।