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14 Oct 2026•
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नाचना में फसल बीमा घोटाले के आरोपों को लेकर किसानों में आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

नाचना में फसल बीमा घोटाले के आरोपों को लेकर किसानों में आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

✍️ Reporter: Rajendra Kumar 🗓 14 Oct 2026, 03:48 PM 👁 11
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नाचना में फसल बीमा घोटाले के आरोपों को लेकर किसानों में आक्रोश, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

अकाल से बर्बाद फसलों के बीच बीमा लाभ से वंचित किसानों ने उठाई आवाज, बैंक अधिकारियों और बीमा कंपनी की जांच कर कार्रवाई की मांग

नाचना, जैसलमेर | 14 अक्टूबर 2026।

जैसलमेर जिले के नाचना उपनिवेशन क्षेत्र में अकाल से बर्बाद हुई फसलों और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कथित अनियमितताओं को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। इसी को लेकर बुधवार को नाचना क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने तहसीलदार के माध्यम से राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर किसानों को तत्काल राहत दिलाने तथा जिम्मेदार बैंक अधिकारियों और बीमा कंपनी के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
बैंक ने प्रीमियम काटा, फिर दो महीने बाद लौटाया! किसानों ने उठाए गंभीर सवाल

किसानों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नाचना और नोख मदासर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखाओं में पिछले करीब 10 वर्षों से किसानों के खातों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम की राशि काटी जाती रही है। लेकिन इस बार खरीफ फसल के सीजन में कथित तौर पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।

किसानों के अनुसार, जिन किसानों ने ई-मित्र के माध्यम से प्रीमियम जमा करवाया, उनका फसल बीमा हो गया, जबकि जिन किसानों के खातों से बैंक द्वारा सीधे प्रीमियम की राशि काटी गई, उनमें से अधिकांश का बीमा नहीं हुआ। आरोप है कि करीब दो महीने बाद बैंक ने बिना पूर्व सूचना दिए प्रीमियम की राशि वापस किसानों के खातों में जमा कर दी।

किसानों का कहना है कि जब क्षेत्र में अकाल के कारण फसलें चौपट हो गई हैं, तब फसल बीमा योजना से राहत मिलने की उम्मीद थी। ऐसे समय में बीमा नहीं होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है। किसानों ने पूरे मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और पात्र किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है।

फार्मर आईडी और ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड का मुद्दा भी उठा

ज्ञापन में किसानों ने बताया कि बैंक प्रबंधन की ओर से फार्मर आईडी वाले किसानों का ही बीमा किए जाने की बात कही जा रही है। किसानों का आरोप है कि नाचना उपनिवेशन क्षेत्र की कृषि भूमि अभी तक राजस्व रिकॉर्ड में ऑनलाइन दर्ज नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पाई है।

इस समस्या के चलते किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होने की बात कह रहे हैं। किसानों ने मांग की कि उपनिवेशन क्षेत्र की कृषि भूमि को प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन दर्ज करवाया जाए, ताकि किसानों की फार्मर आईडी बन सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री से की गईं चार प्रमुख मांगें

किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं—

1. खेतों का संयुक्त निरीक्षण: तहसीलदार और बीमा कंपनी के अधिकारी संयुक्त रूप से खेतों का मौका निरीक्षण कर फसल खराबे का वास्तविक आकलन करें।

2. प्रभावित किसानों को बीमा लाभ: जिन किसानों के खातों से फसल बीमा प्रीमियम काटा गया है, उनके मामलों की जांच कर नियमानुसार तत्काल बीमा लाभ दिलाया जाए।

3. जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई: बैंक और बीमा कंपनी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

4. भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन कर फार्मर आईडी बनाई जाए: नाचना उपनिवेशन क्षेत्र की कृषि भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में ऑनलाइन दर्ज करवाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।

किसानों ने कहा—अकाल में बीमा ही था सहारा

ज्ञापन सौंपने पहुंचे किसानों ने कहा कि अकाल के कारण खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। ऐसी स्थिति में फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सहारा बन सकती थी, लेकिन बीमा नहीं होने की समस्या ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसानों ने प्रशासन और राज्य सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान करने की अपील की।

इस दौरान तहसीलदार नाचना ने किसानों को ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने तथा नियमानुसार कार्रवाई करवाने का आश्वासन दिया।

ये रहे उपस्थित

इस दौरान ग्रामीणों, समाजसेवियों एवं किसानों में गिरिराज चांडक, रमेश कुमार गर्ग, भवानी शंकर सेन, मोहित सोनी, नखत सिंह देवड़ा, रमेश शर्मा, पूरन भार्गव, मगाराम सुथार, भैराराम सुथार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

अब किसानों की निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी, फसल बीमा से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा और प्रभावित किसानों को उनका हक मिल सकेगा।

किसानों की मांग स्पष्ट है—फसल खराबे का उचित मुआवजा, बीमा संबंधी अनियमितताओं की जांच और नाचना उपनिवेशन क्षेत्र के भूमि रिकॉर्ड का शीघ्र डिजिटलीकरण।
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