📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / NaziaAkhtar27
धर्म
नाज़िया खान ने उज्जैन के रामघाट पर तर्पण‑पिंडदान किया, सनातन धर्म अपनाने का संकेत
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 10 अक्टू. 2026, 03:16 PM
👁 13
उज्जैन के रामघाट पर तर्पण‑पिंडदान के दौरान नाज़िया खान ने कहा कि एक मुस्लिम भी अपने पूर्वजों को सम्मानित कर सकता है, अन्य धर्मों के समान।
उज्जैन के शिप्रा नदी के किनारे स्थित प्राचीन रामघाट में तर्पण‑पिंडदान का आयोजन हुआ, जहाँ मुस्लिम समुदाय की प्रतिनिधि नाज़िया खान ने यह अनुष्ठान किया। स्थानीय दर्शकों की उपस्थिति में यह कार्यक्रम क्षेत्रीय मीडिया द्वारा रिपोर्ट किया गया।
तर्पण के महत्व पर बात करते हुए खान ने कहा कि यहूदी, जैन और अन्य धर्मों के अनुयायी अपने पूर्वजों को स्मरण करने के लिए पवित्र स्थलों पर अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक मुस्लिम व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
उनकी बातों ने धार्मिक सद्भावना और अंतर‑धार्मिक समावेशिता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, यह संकेत देते हुए कि आध्यात्मिक प्रथाएँ धार्मिक सीमाओं में बंधी नहीं होनी चाहिए। यह समारोह, जो हिन्दू परम्परा में निहित है, खान के व्यक्तिगत श्रद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म के कुछ पहलुओं को अपनाने का संकेत दिया।
यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के पारस्परिक आदान‑प्रदान पर चल रही चर्चा में एक नया आयाम जोड़ती है।
तर्पण के महत्व पर बात करते हुए खान ने कहा कि यहूदी, जैन और अन्य धर्मों के अनुयायी अपने पूर्वजों को स्मरण करने के लिए पवित्र स्थलों पर अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक मुस्लिम व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं कर सकता।
उनकी बातों ने धार्मिक सद्भावना और अंतर‑धार्मिक समावेशिता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, यह संकेत देते हुए कि आध्यात्मिक प्रथाएँ धार्मिक सीमाओं में बंधी नहीं होनी चाहिए। यह समारोह, जो हिन्दू परम्परा में निहित है, खान के व्यक्तिगत श्रद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म के कुछ पहलुओं को अपनाने का संकेत दिया।
यह घटना मध्य प्रदेश में धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के पारस्परिक आदान‑प्रदान पर चल रही चर्चा में एक नया आयाम जोड़ती है।