📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / John Hill
धर्म
माउंट आबू की पहाड़ी पर मुखरी माता मंदिर, मोर‑मोरनी की समाधि से जुड़ी अनोखी मान्याएँ
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 17 अक्टू. 2026, 06:31 PM
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राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू की पहाड़ी पर स्थित मुखरी माता मंदिर को मोर‑मोरनी की समाधि से जुड़ी अनोखी मान्यताओं के कारण श्रद्धालु विशेष रूप से मानते हैं।
मुखरी माता मंदिर राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू की पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ तक पहुँचने के लिए एक छोटा ट्रेक करना पड़ता है, जिससे अरावली की सुंदर दृश्यावली मिलती है। यह मंदिर स्थानीय देवी‑देवता मुखरी माता को समर्पित है और आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल है।
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, इस मंदिर के परिसर में मोर और मोरनी नामक दो पौराणिक व्यक्तियों की समाधि स्थित है। कहा जाता है कि वे दो पवित्र संत थे जिनकी आत्मा इस पहाड़ी की रक्षा करती है और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूरी करती है।
भक्त मंदिर में प्रवेश करने से पहले समाधि के चारों ओर परिक्रमा करना अपना कर्तव्य मानते हैं, मानते हैं कि इस रिवाज़ से आशीर्वाद मिलता है और बुरे भाग्य से बचाव होता है। यह अनोखी मान्यता मंदिर को राजस्थान के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।
सिरोही जिला पर्यटन विभाग ने बताया है कि त्योहारी मौसम में यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिससे पहुँच के रास्ते और बुनियादी सुविधाओं में छोटे‑छोटे सुधार किए जा रहे हैं, साथ ही सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने पर भी बल दिया गया है।
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, इस मंदिर के परिसर में मोर और मोरनी नामक दो पौराणिक व्यक्तियों की समाधि स्थित है। कहा जाता है कि वे दो पवित्र संत थे जिनकी आत्मा इस पहाड़ी की रक्षा करती है और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूरी करती है।
भक्त मंदिर में प्रवेश करने से पहले समाधि के चारों ओर परिक्रमा करना अपना कर्तव्य मानते हैं, मानते हैं कि इस रिवाज़ से आशीर्वाद मिलता है और बुरे भाग्य से बचाव होता है। यह अनोखी मान्यता मंदिर को राजस्थान के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है।
सिरोही जिला पर्यटन विभाग ने बताया है कि त्योहारी मौसम में यहाँ आने वाले यात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है, जिससे पहुँच के रास्ते और बुनियादी सुविधाओं में छोटे‑छोटे सुधार किए जा रहे हैं, साथ ही सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने पर भी बल दिया गया है।