📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Lakhan Singh Bhargav
अपराध
एमपी उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया: पत्नी के मौन रहने पर भी 498ए FIR को काउंटरब्लास्ट नहीं माना जाएगा
✍️ Live Law
🗓 08 अक्टू. 2026, 02:02 PM
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि यदि पत्नी वैवाहिक संबंध बचाने के लिये मौन रहती है, तो 498ए के तहत देर से दायर की गई FIR को काउंटरब्लास्ट नहीं माना जाएगा।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 498ए के तहत देर से दायर की गई शिकायतों की स्थिति स्पष्ट करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी वैवाहिक संबंध बचाने के लिए मौन रहती है, तो देर से दायर की गई FIR को काउंटरब्लास्ट नहीं माना जाएगा।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि पति या पत्नी का मौन शिकायत को अमान्य नहीं करता और अपराध के लिए अभियोजन की संभावना को समाप्त नहीं करता। यह कदम उन पीड़ितों की रक्षा के लिए है जो डर या परिवार के हित में तुरंत बोलने से हिचकिचाते हैं।
यह फैसला अन्य न्यायक्षेत्रों में भी देर से दायर की गई 498ए शिकायतों के निपटारे पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे कानूनी व्यवस्था पीड़ितों को मौन रहने के कारण दण्डित नहीं करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैवाहिक दुर्व्यवहार के मामलों में समयबद्धता को एक सुरक्षा कवच के रूप में उपयोग करने से रोकता है।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि पति या पत्नी का मौन शिकायत को अमान्य नहीं करता और अपराध के लिए अभियोजन की संभावना को समाप्त नहीं करता। यह कदम उन पीड़ितों की रक्षा के लिए है जो डर या परिवार के हित में तुरंत बोलने से हिचकिचाते हैं।
यह फैसला अन्य न्यायक्षेत्रों में भी देर से दायर की गई 498ए शिकायतों के निपटारे पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे कानूनी व्यवस्था पीड़ितों को मौन रहने के कारण दण्डित नहीं करेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैवाहिक दुर्व्यवहार के मामलों में समयबद्धता को एक सुरक्षा कवच के रूप में उपयोग करने से रोकता है।