📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
देश
एमपी हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड कचरे की राख में पारा की जांच का आदेश दिया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 03 सित. 2026, 08:19 PM
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एमपी हाईकोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सात दिनों में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में पारा की मौजूदगी की जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
एमपी हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने के बाद बची राख में पारा होने के आरोपों पर कड़ी कार्रवाई की। कोर्ट ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) को सात दिनों के भीतर इस मुद्दे की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
यूनियन कार्बाइड की गतिविधियों को पर्यावरणीय अनुपालन के संदर्भ में पहले भी सवालों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण संगठनों ने कहा है कि जलाने के बाद बची राख में यदि पारा जैसे भारी धातु मौजूद हैं तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कोर्ट के आदेश में एमपीसीबी को राख के नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कर परिणाम दस्तावेज़ित करने और सभी संबंधित पक्षों—शिकायतकर्ता, कंपनी और राज्य सरकार—को रिपोर्ट की प्रतियां प्रदान करने का निर्देश शामिल है। परीक्षण राष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
यदि जांच में पारा की उपस्थिति सिद्ध होती है, तो हाईकोर्ट संभावित दंड, सुरक्षित निपटान और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों का आदेश दे सकता है। यह निर्णय भारत में औद्योगिक प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति न्यायिक सतर्कता को दर्शाता है।
यह मामला हाल के कई पर्यावरणीय मुकदमों में से एक है, जो खतरनाक कचरे के प्रबंधन पर नागरिक समाज और न्यायालयों की बढ़ती नज़र को उजागर करता है।
यूनियन कार्बाइड की गतिविधियों को पर्यावरणीय अनुपालन के संदर्भ में पहले भी सवालों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण संगठनों ने कहा है कि जलाने के बाद बची राख में यदि पारा जैसे भारी धातु मौजूद हैं तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
कोर्ट के आदेश में एमपीसीबी को राख के नमूनों का प्रयोगशाला परीक्षण कर परिणाम दस्तावेज़ित करने और सभी संबंधित पक्षों—शिकायतकर्ता, कंपनी और राज्य सरकार—को रिपोर्ट की प्रतियां प्रदान करने का निर्देश शामिल है। परीक्षण राष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
यदि जांच में पारा की उपस्थिति सिद्ध होती है, तो हाईकोर्ट संभावित दंड, सुरक्षित निपटान और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों का आदेश दे सकता है। यह निर्णय भारत में औद्योगिक प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति न्यायिक सतर्कता को दर्शाता है।
यह मामला हाल के कई पर्यावरणीय मुकदमों में से एक है, जो खतरनाक कचरे के प्रबंधन पर नागरिक समाज और न्यायालयों की बढ़ती नज़र को उजागर करता है।