📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
नौकरी
एमपी हाईकोर्ट ने नियमितिकरण के लिए लंबी सेवा का प्रमाण देना अनिवार्य किया
✍️ Amar Ujala · Jabalpur
🗓 31 अग. 2026, 11:32 PM
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एमपी हाईकोर्ट के युगलपीठ ने कहा कि नियमितिकरण की इच्छा रखने वाले कर्मचारियों को अपनी निरंतर सेवा का प्रमाण देना अनिवार्य है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के युगलपीठ ने यह आदेश दिया है कि नियमितिकरण के लिये आवेदन करने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपनी लंबी और निरंतर सेवा का दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यह आदेश जबलपुर में दिया गया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि केवल सेवा का दावा पर्याप्त नहीं होगा; नियुक्ति पत्र, सेवा रेकॉर्ड और संबंधित कागजात जमा करने होंगे।
राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र में अनुबंध और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितिकरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच यह फैसला आया है। ठोस प्रमाण की मांग करके न्यायालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि केवल वही कर्मचारी स्थायी पद प्राप्त कर सकें जिन्होंने वास्तव में निर्धारित अवधि की सेवा पूरी की हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नियमितिकरण के लंबित मामलों को सुलझाने और पात्रता पर विवादों को कम करने में मददगार होगा। प्रभावित कर्मचारियों को सभी संबंधित सेवा दस्तावेज़ इकट्ठा कर निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग को सौंपने की सलाह दी गई है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कोई विशिष्ट अंतिम तिथि नहीं बताई, पर यह चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर नियमितिकरण याचिकाएँ खारिज की जा सकती हैं। यह निर्देश सभी राज्य विभागों को संप्रेषित किया जाएगा ताकि कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र में अनुबंध और अस्थायी कर्मचारियों के नियमितिकरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच यह फैसला आया है। ठोस प्रमाण की मांग करके न्यायालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि केवल वही कर्मचारी स्थायी पद प्राप्त कर सकें जिन्होंने वास्तव में निर्धारित अवधि की सेवा पूरी की हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नियमितिकरण के लंबित मामलों को सुलझाने और पात्रता पर विवादों को कम करने में मददगार होगा। प्रभावित कर्मचारियों को सभी संबंधित सेवा दस्तावेज़ इकट्ठा कर निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित विभाग को सौंपने की सलाह दी गई है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कोई विशिष्ट अंतिम तिथि नहीं बताई, पर यह चेतावनी दी कि अनुपालन न करने पर नियमितिकरण याचिकाएँ खारिज की जा सकती हैं। यह निर्देश सभी राज्य विभागों को संप्रेषित किया जाएगा ताकि कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।