📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / moneycontrol
बिज़नेस
मनीकंट्रोल का एडवांस बिज़नेस इंडेक्स जुलाई में 5‑महीने के उच्च स्तर पर
✍️ Moneycontrol.com
🗓 11 अग. 2026, 07:36 AM
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मनीकंट्रोल के एडवांस बिज़नेस इंडेक्स ने जुलाई में पाँच महीने के उच्च स्तर को छुआ, जिससे भारतीय व्यवसायों में बढ़ती आशावादिता का संकेत मिलता है, जबकि पीएमआई संकेतकों में हल्की नरमी दिखाई दी।
मनीकंट्रोल द्वारा संकलित एडवांस बिज़नेस इंडेक्स ने जुलाई में 5,300 अंक तक पहुँच कर पाँच महीने के उच्च स्तर को छुआ। यह सूचकांक भारतीय कंपनियों के व्यापक समूह से प्राप्त भावना को दर्शाता है, जो भविष्य के विकास के प्रति बढ़ती आशावादिता को दर्शाता है।
विश्लेषकों ने बताया कि यह उछाल मुद्रास्फीति में हल्की कमी और सहायक मौद्रिक नीति के बीच आया है, जिससे कॉर्पोरेट भावना को बल मिला है। फिर भी, सूचकांक की वृद्धि पीएमआई (Purchasing Managers’ Index) के हल्के नरमी से संतुलित है, जो यह संकेत देता है कि उत्पादन गतिविधि अभी भी सतर्क बनी हुई है।
मनीकंट्रोल की कार्यप्रणाली में विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारिक अधिकारियों के सर्वेक्षण शामिल हैं, जो भविष्य की बिक्री और लाभप्रदता के प्रति अपेक्षाओं का वास्तविक‑समय माप प्रदान करते हैं। जुलाई की पढ़ाई से पता चलता है कि अधिक कंपनियाँ आने वाले महीनों में बेहतर बिक्री और लाभ की उम्मीद कर रही हैं।
निवेशक इस सूचकांक पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि यह कॉर्पोरेट आय और इक्विटी निवेश निर्णयों के लिए बाजार की अपेक्षाओं को प्रभावित कर सकता है। यह उछाल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन को भी उजागर करता है।
विश्लेषकों ने बताया कि यह उछाल मुद्रास्फीति में हल्की कमी और सहायक मौद्रिक नीति के बीच आया है, जिससे कॉर्पोरेट भावना को बल मिला है। फिर भी, सूचकांक की वृद्धि पीएमआई (Purchasing Managers’ Index) के हल्के नरमी से संतुलित है, जो यह संकेत देता है कि उत्पादन गतिविधि अभी भी सतर्क बनी हुई है।
मनीकंट्रोल की कार्यप्रणाली में विभिन्न क्षेत्रों के व्यापारिक अधिकारियों के सर्वेक्षण शामिल हैं, जो भविष्य की बिक्री और लाभप्रदता के प्रति अपेक्षाओं का वास्तविक‑समय माप प्रदान करते हैं। जुलाई की पढ़ाई से पता चलता है कि अधिक कंपनियाँ आने वाले महीनों में बेहतर बिक्री और लाभ की उम्मीद कर रही हैं।
निवेशक इस सूचकांक पर कड़ी नजर रख रहे हैं क्योंकि यह कॉर्पोरेट आय और इक्विटी निवेश निर्णयों के लिए बाजार की अपेक्षाओं को प्रभावित कर सकता है। यह उछाल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन को भी उजागर करता है।