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08 नव. 2026•
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मोदी ने ‘डिमागी नक्सल’ के खिलाफ संघर्ष की पुकार की, विचारधारात्मक खतरा बना रहे
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Narendra Modi
राजनीति

मोदी ने ‘डिमागी नक्सल’ के खिलाफ संघर्ष की पुकार की, विचारधारात्मक खतरा बना रहे

✍️ The Hawk 🗓 08 नव. 2026, 03:16 PM 👁 16
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सशस्त्र नक्सलियों का दौर खत्म हो गया है, पर विचारधारात्मक खतरा बना है और ‘डिमागी नक्सल’ के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि नक्सली आंदोलन का सशस्त्र चरण अब काफी हद तक समाप्त हो चुका है, पर विचारधारात्मक प्रवृत्तियाँ अभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनकर बनी हुई हैं। उन्होंने उन व्यक्तियों और समूहों को ‘डिमागी नक्सल’ कहा जो हिंसा के बिना बाएँ‑पंखी विचारधारा को फैलाते हैं। मोदी ने केंद्र‑राज्य स्तर पर तथा नागरिक समाज को इस विचारधारा के मुकाबले के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति आवश्यक है, जिसमें खुफिया निगरानी, विचारधारा‑विरोधी पुनर्वास कार्यक्रम और प्रभावित क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विचारधारात्मक पहलू को अनदेखा किया गया तो यह आंदोलन नए रूप में फिर से उभर सकता है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को खतरा हो सकता है।

यह बयान नक्सली समस्या के समाधान पर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ विशेषज्ञ सुरक्षा उपायों के साथ सामाजिक‑आर्थिक पहलों को मिलाकर ही स्थायी समाधान संभव मानते हैं। सरकार ने ‘डिमागी नक्सल’ के प्रभाव को कम करने के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने और दोहरी रणनीति को सुदृढ़ करने का संकल्प जताया है।
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