📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Digital Presidential Library, Rashtrapati Bhavan (
धर्म
मिज़ोरम के लोग ‘शैतानी संख्या’ के डर से पहचान नेटवर्क से दूर
✍️ timesofindia.indiatimes.com
🗓 05 सित. 2026, 12:18 AM
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मिज़ोरम की कुछ समुदाय 666, जिसे ‘शैतानी संख्या’ कहा जाता है, के डर से राज्य के पहचान‑नेट का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
मिज़ोरम में हाल ही में शुरू किया गया पहचान‑नेट, जो नागरिक सेवाओं को सरल बनाने के लिए बनाया गया था, स्थानीय समुदाय के एक हिस्से से अप्रत्याशित प्रतिरोध का सामना कर रहा है। कुछ लोग इस प्लेटफ़ॉर्म में 666 संख्या के उपयोग को लेकर अनिच्छा जताते हैं, जिसे कई संस्कृतियों में शैतान से जोड़ा जाता है।
स्थानीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह अंधविश्वास सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर रहा है, जिससे लोग डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया से दूर रह रहे हैं, जबकि प्रणाली के कोई तकनीकी दोष नहीं हैं। यह हिचकिचाहट पूरी तरह से सांस्कृतिक मान्यताओं में निहित प्रतीत होती है।
यह मामला दर्शाता है कि पारम्परिक अंक‑विश्वास आधुनिक प्रशासनिक पहलों के साथ कैसे टकरा सकते हैं, और अधिकारियों को ऐसे मुद्दों को हल करने के लिए जागरूकता अभियानों पर विचार करना पड़ सकता है, बिना प्रणाली में बदलाव किए।
स्थानीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह अंधविश्वास सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर रहा है, जिससे लोग डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया से दूर रह रहे हैं, जबकि प्रणाली के कोई तकनीकी दोष नहीं हैं। यह हिचकिचाहट पूरी तरह से सांस्कृतिक मान्यताओं में निहित प्रतीत होती है।
यह मामला दर्शाता है कि पारम्परिक अंक‑विश्वास आधुनिक प्रशासनिक पहलों के साथ कैसे टकरा सकते हैं, और अधिकारियों को ऐसे मुद्दों को हल करने के लिए जागरूकता अभियानों पर विचार करना पड़ सकता है, बिना प्रणाली में बदलाव किए।