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कृषि
तमिलनाडु के मेत्तूर बांध का 80‑दिन बाद खुलना, कावेरी किसानों की अनिश्चितता
✍️ India Today
🗓 02 सित. 2026, 02:30 AM
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कावेरी नदी के मेत्तूर बांध को 80‑दिन बाद खोल दिया गया, पर जल निकासी से किसानों की सिंचाई स्थिति अभी भी अस्पष्ट है।
तमिलनाडु के कावेरी नदी पर स्थित सबसे बड़ा जलाशय, मेत्तूर बांध को 80‑दिन के तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से बंद रहने के बाद खोल दिया गया। बुधवार सुबह जल प्रवाह शुरू हुआ, जिससे जलाशय का स्तर धीरे‑धीरे बढ़ रहा है।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि जल का प्राथमिक उपयोग पीने और औद्योगिक जरूरतों के लिए होगा, परंतु यह मात्रा कावेरी जलक्षेत्र के किसानों की पूरी सिंचाई मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। यह समय कई धान और जौ‑जैसे फसलों की बुवाई के महत्वपूर्ण चरण के साथ मेल खाता है।
ईरोड, करूर और तिरुचिरप्पल्ली जैसे जिलों के किसानों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ ने कई हफ्तों की सूखे के बाद किसी भी मात्रा में जल को स्वागत किया, जबकि अन्य ने चेतावनी दी कि देर से खोलना फसल की पैदावार को जोखिम में डाल सकता है यदि जल प्रवाह मौसम भर बना न रहे। कृषि अधिकारियों ने किसानों से जल‑संरक्षण उपाय अपनाने और जल विभाग के आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा है।
आगामी हफ्तों में जल निकासी की दरों की निगरानी की जाएगी और जलाशय के स्तर व नीचे के मांग के आधार पर रिलीज़ में बदलाव किया जा सकता है। यह घटना कावेरी जलक्षेत्र में जल प्रबंधन और कृषि जीविकोपार्जन के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करती है।
राज्य अधिकारियों ने बताया कि जल का प्राथमिक उपयोग पीने और औद्योगिक जरूरतों के लिए होगा, परंतु यह मात्रा कावेरी जलक्षेत्र के किसानों की पूरी सिंचाई मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। यह समय कई धान और जौ‑जैसे फसलों की बुवाई के महत्वपूर्ण चरण के साथ मेल खाता है।
ईरोड, करूर और तिरुचिरप्पल्ली जैसे जिलों के किसानों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ ने कई हफ्तों की सूखे के बाद किसी भी मात्रा में जल को स्वागत किया, जबकि अन्य ने चेतावनी दी कि देर से खोलना फसल की पैदावार को जोखिम में डाल सकता है यदि जल प्रवाह मौसम भर बना न रहे। कृषि अधिकारियों ने किसानों से जल‑संरक्षण उपाय अपनाने और जल विभाग के आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा है।
आगामी हफ्तों में जल निकासी की दरों की निगरानी की जाएगी और जलाशय के स्तर व नीचे के मांग के आधार पर रिलीज़ में बदलाव किया जा सकता है। यह घटना कावेरी जलक्षेत्र में जल प्रबंधन और कृषि जीविकोपार्जन के बीच नाजुक संतुलन को उजागर करती है।