📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Guillaume Paumier
टेक्नोलॉजी
मेटा और स्नैप पर युवा सोशल मीडिया लत के मामले में यूएस में मुकदमा, ज़ुकरबर्ग व स्पीगल गवाही देंगे
✍️ Asianet Newsable
🗓 29 अक्टू. 2026, 08:35 AM
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अमेरिकी अदालत ने मेटा और स्नैप पर युवा उपयोगकर्ताओं की लत बढ़ाने का आरोप लगाते हुए नया मुकदमा दायर किया, जहाँ मार्क ज़ुकरबर्ग और इवान स्पीगल गवाही देंगे।
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स और स्नैप इंक. पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया है कि किशोरों में लत लग जाए, जिससे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हुआ। याचिका में यह बताया गया है कि कंपनियों को युवा मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे स्क्रीन टाइम के हानिकारक प्रभावों का आंतरिक शोध से पता था।
मामले की सुनवाई इस वर्ष के बाद में निर्धारित है, और दोनों कंपनियों के सीईओ—मार्क ज़ुकरबर्ग (मेटा) और इवान स्पीगल (स्नैप)—को गवाही देने के लिए सम्मन किया गया है। उनकी गवाही में ऐप डिज़ाइन, उपयोगकर्ता सहभागिता आँकड़े और युवा उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव से जुड़ी आंतरिक चर्चाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकदमा सोशल‑मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई उच्च‑प्रोफ़ाइल मामलों के बाद आया है और यह भविष्य में अमेरिकी तथा अंतर्राष्ट्रीय नियामक कदमों को प्रभावित कर सकता है। यदि याचिकाकर्ता जीतते हैं, तो कंपनियों को भारी जुर्माना और नाबालिगों के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने का आदेश मिल सकता है।
यह मामला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों पर बढ़ती सार्वजनिक और सरकारी जांच को भी उजागर करता है, क्योंकि विश्व भर के नीति निर्माताओं ने किशोरों में सोशल‑मीडिया लत को रोकने के लिए कड़े नियमों पर चर्चा शुरू कर दी है।
मामले की सुनवाई इस वर्ष के बाद में निर्धारित है, और दोनों कंपनियों के सीईओ—मार्क ज़ुकरबर्ग (मेटा) और इवान स्पीगल (स्नैप)—को गवाही देने के लिए सम्मन किया गया है। उनकी गवाही में ऐप डिज़ाइन, उपयोगकर्ता सहभागिता आँकड़े और युवा उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव से जुड़ी आंतरिक चर्चाओं पर प्रकाश डाला जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुकदमा सोशल‑मीडिया कंपनियों के खिलाफ कई उच्च‑प्रोफ़ाइल मामलों के बाद आया है और यह भविष्य में अमेरिकी तथा अंतर्राष्ट्रीय नियामक कदमों को प्रभावित कर सकता है। यदि याचिकाकर्ता जीतते हैं, तो कंपनियों को भारी जुर्माना और नाबालिगों के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू करने का आदेश मिल सकता है।
यह मामला डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों पर बढ़ती सार्वजनिक और सरकारी जांच को भी उजागर करता है, क्योंकि विश्व भर के नीति निर्माताओं ने किशोरों में सोशल‑मीडिया लत को रोकने के लिए कड़े नियमों पर चर्चा शुरू कर दी है।