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मेवाड़ की लोकप्रिय गवरी का युवा द्वारा अपमान, पाखंडवाद बताने पर मचा बवाल
मेवाड़ क्षेत्र में सदियों से चली आ रही लोक प्रिय 'गवरी' लोकनाट्य का एक युवा द्वारा अपमानजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। युवा ने गवरी को पाखंडवाद बताते हुए उसका अनादर किया, जिसके बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
मेवाड़ की सांस्कृतिक धरोहर और लोक प्रिय लोकनाट्य 'गवरी' को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में एक युवा ने इस पारंपरिक कला का अपमान करते हुए इसे 'पाखंडवाद' करार दिया। इस टिप्पणी से स्थानीय समुदाय और कला प्रेमियों में गहरा आक्रोश है, जो गवरी को अपनी पहचान और संस्कृति का अभिन्न अंग मानते हैं।
यह घटना उस समय प्रकाश में आई जब उक्त युवा की टिप्पणियां सार्वजनिक हुईं। गवरी, जो कि शिव-भैरू की कथा पर आधारित एक अनूठी नाट्य परंपरा है, मेवाड़ क्षेत्र में विशेष रूप से श्रावण और भाद्रपद मास में खेली जाती है। यह केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेशों और धार्मिक आस्थाओं का भी प्रतीक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी न केवल गवरी का, बल्कि उस पूरी परंपरा और उसके पीछे की आस्था का अपमान है, जिसे पीढ़ियों से सहेजा गया है। समुदाय ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि ऐसे बयानों से बचा जाना चाहिए जो सांस्कृतिक धरोहरों को ठेस पहुंचाते हों।
यह घटना उस समय प्रकाश में आई जब उक्त युवा की टिप्पणियां सार्वजनिक हुईं। गवरी, जो कि शिव-भैरू की कथा पर आधारित एक अनूठी नाट्य परंपरा है, मेवाड़ क्षेत्र में विशेष रूप से श्रावण और भाद्रपद मास में खेली जाती है। यह केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेशों और धार्मिक आस्थाओं का भी प्रतीक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी न केवल गवरी का, बल्कि उस पूरी परंपरा और उसके पीछे की आस्था का अपमान है, जिसे पीढ़ियों से सहेजा गया है। समुदाय ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और मांग की है कि ऐसे बयानों से बचा जाना चाहिए जो सांस्कृतिक धरोहरों को ठेस पहुंचाते हों।