Agriculture
मसौढ़ी में मानसून की बेरुखी से किसान गंभीर चिंता में हैं।
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मसौढ़ी के किसानों का कहना है कि उनकी उम्मीदें अगस्त पर टिकी थीं,
बिहार में मानसून का पहला आधा चरण उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है, जिससे खेतों की प्यास नहीं बुझ पाई है। लगातार कमजोर मानसून के कारण सुखाड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, और अब किसानों की सारी उम्मीदें अगस्त महीने पर टिकी हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में 42 प्रतिशत बारिश के घाटे की भरपाई केवल कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश से संभव नहीं है। इसके लिए पूरे बिहार में अगस्त के दौरान लगातार और व्यापक वर्षा की आवश्यकता होगी। सभी की निगाहें अब अगस्त पर हैं, क्योंकि यही महीना तय करेगा कि बिहार इस बड़ी कमी से कितना उबर पाता है।
लेकिन इस महीने के 12-13 दिन बीत जाने के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
किसान पंचानन सिंह ने बताया कि ऐसी छिटपुट बारिश से धान की उपज कर पाना असंभव है।
किसान विश्वनाथ सिंह ने कहा कि वे किसी तरह मोटर चलाकर खेतों में पानी दे रहे हैं, लेकिन तपती धूप और पुरवड्या हवा पानी को सोख लेती है। किसान परमानंद महतो ने बिजली की आंख-मिचौली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूरी तरह बिजली नहीं मिल पाती, जिससे किसान अपने खेतों में पानी चलाकर धान को जीवित रख सकें। किसान प्रेम कुमार के अनुसार, बिजली विभाग ओवरलोड का हवाला देता है।
अभी तो किसी तरह पानी चलाकर धान के पौधों को जीवित रखा जा रहा है फिर भी कई खेतों में
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य में 42 प्रतिशत बारिश के घाटे की भरपाई केवल कुछ इलाकों में मूसलाधार बारिश से संभव नहीं है। इसके लिए पूरे बिहार में अगस्त के दौरान लगातार और व्यापक वर्षा की आवश्यकता होगी। सभी की निगाहें अब अगस्त पर हैं, क्योंकि यही महीना तय करेगा कि बिहार इस बड़ी कमी से कितना उबर पाता है।
लेकिन इस महीने के 12-13 दिन बीत जाने के बाद भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।
किसान पंचानन सिंह ने बताया कि ऐसी छिटपुट बारिश से धान की उपज कर पाना असंभव है।
किसान विश्वनाथ सिंह ने कहा कि वे किसी तरह मोटर चलाकर खेतों में पानी दे रहे हैं, लेकिन तपती धूप और पुरवड्या हवा पानी को सोख लेती है। किसान परमानंद महतो ने बिजली की आंख-मिचौली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पूरी तरह बिजली नहीं मिल पाती, जिससे किसान अपने खेतों में पानी चलाकर धान को जीवित रख सकें। किसान प्रेम कुमार के अनुसार, बिजली विभाग ओवरलोड का हवाला देता है।
अभी तो किसी तरह पानी चलाकर धान के पौधों को जीवित रखा जा रहा है फिर भी कई खेतों में