📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Oinam Premchand
राजनीति
मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में 1990 के नागा‑कुकी संघर्ष के विस्थापन से गांवों की संख्या बढ़ी, विधायक ने कहा
✍️ Deccan Herald
🗓 22 अग. 2026, 05:53 PM
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एक विधायक ने कहा कि 1990 के नागा‑कुकी संघर्ष से विस्थापित लोगों के कारण मणिपुर के पहाड़ी जिलों में गांवों की संख्या बढ़ी है।
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में गांवों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे एक विधायक ने 1990 के दशक में नागा‑कुकी संघर्ष से हुए विस्थापन से जोड़ा। विधायक ने डेक्कन हेराल्ड को बताया कि घाटी क्षेत्र में हिंसा के कारण कई परिवार पहाड़ों की ओर भागे, जहाँ उन्होंने नई बस्तियां स्थापित कीं जो बाद में गांव के रूप में मान्यता प्राप्त हुईं।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में मान्यता प्राप्त गांवों की संख्या में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है, जो उस समय की हिंसा से उत्पन्न जनसंख्या परिवर्तन को दर्शाती है। जबकि संघर्ष कई साल पहले समाप्त हो गया है, इसका प्रभाव अभी भी बस्तियों के वितरण और प्रशासनिक मानचित्रों में दिख रहा है।
स्थानीय प्रशासन को बढ़ी हुई गांव सूची के परिणामस्वरूप बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और स्थानीय शासन में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने राज्य सरकार से अपील की कि विस्थापित समुदायों को पर्याप्त समर्थन मिल सके, इसके लिए विशेष नीतियों को लागू किया जाए।
यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि ऐतिहासिक जातीय संघर्षों के दीर्घकालिक प्रभाव जनसंख्या वितरण पर कैसे पड़ते हैं, और पोस्ट‑कॉन्फ्लिक्ट क्षेत्रों में लक्षित नीति उपायों की आवश्यकता को उजागर करती है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पिछले तीन दशकों में मान्यता प्राप्त गांवों की संख्या में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है, जो उस समय की हिंसा से उत्पन्न जनसंख्या परिवर्तन को दर्शाती है। जबकि संघर्ष कई साल पहले समाप्त हो गया है, इसका प्रभाव अभी भी बस्तियों के वितरण और प्रशासनिक मानचित्रों में दिख रहा है।
स्थानीय प्रशासन को बढ़ी हुई गांव सूची के परिणामस्वरूप बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सेवाओं और स्थानीय शासन में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने राज्य सरकार से अपील की कि विस्थापित समुदायों को पर्याप्त समर्थन मिल सके, इसके लिए विशेष नीतियों को लागू किया जाए।
यह रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि ऐतिहासिक जातीय संघर्षों के दीर्घकालिक प्रभाव जनसंख्या वितरण पर कैसे पड़ते हैं, और पोस्ट‑कॉन्फ्लिक्ट क्षेत्रों में लक्षित नीति उपायों की आवश्यकता को उजागर करती है।