📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Andy Doane
राजनीति
मणिपुर समूह ने जनगणना व एनआरसी मांग पर 24‑घंटे का हड़ताल का एलान किया
✍️ India Today NE
🗓 31 अग. 2026, 04:37 PM
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मणिपुर के एक सामाजिक समूह ने जनगणना और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) में बदलाव की मांग करते हुए 24‑घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है।
मणिपुर के कई सामाजिक संगठनों ने गुरुवार को 24‑घंटे की हड़ताल का ऐलान किया, जिसमें वे राष्ट्रीय जनगणना और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) से जुड़ी अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखने का इरादा रखते हैं। इन समूहों का कहना है कि जनगणना की कार्यप्रणाली और एनआरसी के मानदंडों में ऐसी खामियां हैं, जो राज्य की जनजातीय और अल्पसंख्यक समुदायों को बाहर कर सकती हैं।
यह मांग राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे जनगणना और एनआरसी के बहस के बीच आती है, जहाँ 2024 के आम चुनावों के बाद जनगणना आयोजित की जाएगी और एनआरसी को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मणिपुर के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर समाधान नहीं मिला, तो जनगणना राज्य की विशिष्ट जनसंख्या संरचना को सही ढंग से नहीं दर्शा पाएगी और एनआरसी स्थानीय परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करने से कानूनी व सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्य सरकार ने इस हड़ताल को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। मणिपुर सरकार ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया है और कहा है कि वे इन मुद्दों को केंद्र सरकार तक पहुँचाएंगे। अधिकारियों ने स्थिति को करीबी से देख रहे हैं, क्योंकि इस हड़ताल से सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन और दैनिक मजदूरों पर असर पड़ सकता है।
यह मांग राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे जनगणना और एनआरसी के बहस के बीच आती है, जहाँ 2024 के आम चुनावों के बाद जनगणना आयोजित की जाएगी और एनआरसी को लेकर कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मणिपुर के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर समाधान नहीं मिला, तो जनगणना राज्य की विशिष्ट जनसंख्या संरचना को सही ढंग से नहीं दर्शा पाएगी और एनआरसी स्थानीय परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करने से कानूनी व सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्य सरकार ने इस हड़ताल को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। मणिपुर सरकार ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया है और कहा है कि वे इन मुद्दों को केंद्र सरकार तक पहुँचाएंगे। अधिकारियों ने स्थिति को करीबी से देख रहे हैं, क्योंकि इस हड़ताल से सार्वजनिक सेवाओं, परिवहन और दैनिक मजदूरों पर असर पड़ सकता है।