📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Samudra Bikash Hazarika
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राजनीति
हंगर मार्च के 61 साल बाद मणिपुर की एकता संकट में
✍️ India Today NE
🗓 28 अग. 2026, 02:48 PM
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मणिपुर ने हंगर मार्च के 61 साल पूरे किए, परन्तु राज्य अभी भी विभाजित है और एकता की संभावनाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
मणिपुर ने 1963 में हुए ऐतिहासिक हंगर मार्च की 61वीं वर्षगांठ मनाई। यह विरोध अपने प्रतीकात्मक त्याग के कारण क्षेत्र में लंबे समय से चल रही समस्याओं को उजागर करता था।
उसके बाद से राज्य में राजनीतिक और जातीय तनावों की लहरें जारी रही हैं, जिससे सामाजिक बुनावट में फूट पड़ गई है। हालिया विश्लेषणों में यह कहा गया है कि समय-समय पर हुए समझौते के प्रयासों के बावजूद, विभिन्न जिलों में गहरी विभाजन अभी भी मौजूद हैं।
नीति निर्माताओं और समुदाय के नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि मणिपुर इन अंतरालों को पाट कर एकजुट पहचान कैसे बना सकता है। यह संवाद इस बात की तात्कालिकता को रेखांकित करता है कि मूलभूत मुद्दों को सुलझाए बिना राज्य की एकता को पुनः स्थापित करना कठिन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्षगांठ ने न केवल अतीत के संघर्षों की याद दिलाई है, बल्कि मणिपुर की विविध आकांक्षाओं को जोड़ने की वर्तमान चुनौती को भी उजागर किया है।
उसके बाद से राज्य में राजनीतिक और जातीय तनावों की लहरें जारी रही हैं, जिससे सामाजिक बुनावट में फूट पड़ गई है। हालिया विश्लेषणों में यह कहा गया है कि समय-समय पर हुए समझौते के प्रयासों के बावजूद, विभिन्न जिलों में गहरी विभाजन अभी भी मौजूद हैं।
नीति निर्माताओं और समुदाय के नेताओं के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि मणिपुर इन अंतरालों को पाट कर एकजुट पहचान कैसे बना सकता है। यह संवाद इस बात की तात्कालिकता को रेखांकित करता है कि मूलभूत मुद्दों को सुलझाए बिना राज्य की एकता को पुनः स्थापित करना कठिन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्षगांठ ने न केवल अतीत के संघर्षों की याद दिलाई है, बल्कि मणिपुर की विविध आकांक्षाओं को जोड़ने की वर्तमान चुनौती को भी उजागर किया है।