📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Krish Dulal
स्थानीय
झारखंड का मंडर वाद्य को जीआई टैग मिला
✍️ Utkarsh Classes
🗓 01 अक्टू. 2026, 03:02 PM
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झारखंड के पारंपरिक मंडर वाद्य को जीआई टैग से सम्मानित किया गया, जिससे इसकी सांस्कृतिक विरासत को मान्यता मिली।
जीआई टैग भारत सरकार द्वारा 1999 के जीआई अधिनियम के तहत दिया गया है। मंडर, जो बाँस से बना एक परकशन वाद्य है, झारखंड के लोक संगीत में प्रमुख भूमिका निभाता है।
यह पंजीकरण हस्तशिल्पकारों को नकली उत्पादों से बचाने और वाद्य के बाजार मूल्य को बढ़ाने में मदद करेगा। यह टैग इस वाद्य के क्षेत्रीय विशिष्ट गुणों को मान्यता देता है।
यह निर्णय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा घोषित किया गया, और झारखंड राज्य हस्तशिल्प विकास निगम के सहयोग से लागू किया गया। स्थानीय संगीतकारों और निर्माता इस मान्यता पर प्रसन्न हैं।
जीआई टैग से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी, जिससे युवा पीढ़ी को मंडर बनाने और बजाने की कला सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
यह पंजीकरण हस्तशिल्पकारों को नकली उत्पादों से बचाने और वाद्य के बाजार मूल्य को बढ़ाने में मदद करेगा। यह टैग इस वाद्य के क्षेत्रीय विशिष्ट गुणों को मान्यता देता है।
यह निर्णय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा घोषित किया गया, और झारखंड राज्य हस्तशिल्प विकास निगम के सहयोग से लागू किया गया। स्थानीय संगीतकारों और निर्माता इस मान्यता पर प्रसन्न हैं।
जीआई टैग से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी, जिससे युवा पीढ़ी को मंडर बनाने और बजाने की कला सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।