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28 Sep 2026•
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मानिकपुर जनसुनवाई में ग्रामीणों की दो टूक पुराने मामलों के निराकरण की मांग, 27 आपत्तियां दर्ज; पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल बोले- प्रभावितों के अधिकारों की अनदेखी नहीं

✍️ Reporter: Vishwanath Pratap Singh 🗓 26 Sep 2026, 08:20 AM 👁 30
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मानिकपुर ओपन कास्ट खदान की क्षमता 5 से बढ़ाकर 7 लाख मीट्रिक टन करने के प्रस्ताव पर शुक्रवार को पर्यावरण जनसुनवाई हुई। करीब 500 लोगों की मौजूदगी में खदान विस्तार के पक्ष-विपक्ष में आवाजें उठीं लेकिन प्रभावित ग्रामीणों ने पुराने विस्थापन और पुनर्वास के लंबित मामलों को पहले सुलझाने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व में भी आश्वासन मिले लेकिन कई मामले अब तक लंबित हैं। ऐसे में नए विस्तार से पहले पुराने मामलों का निराकरण जरूरी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक एसईसीएल के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा।
जयसिंह अग्रवाल ने संभाला प्रभावितों का पक्ष
पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं लेकिन प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी कर विकास नहीं होना चाहिए। उन्होंने जनसुनवाई को महज औपचारिकता न बनाने की मांग करते हुए कहा कि प्रभावितों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना सामने आनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की। अग्रवाल ने कहा कि वे प्रभावित ग्रामीणों के साथ हैं और उनके अधिकारों की आवाज उठाते रहेंगे।
27 लिखित आपत्तियां, मौखिक बातें भी रिकॉर्ड
जनसुनवाई में कुल 27 लिखित आपत्तियां दर्ज हुईं। इसके अलावा मौखिक आपत्तियों और सुझावों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई, जिसे आगे की प्रक्रिया में रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा। एडिशनल कलेक्टर देवेंद्र पटेल ने बताया कि जनसुनवाई सुबह 11 बजे शुरू हुई और लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
विकास के साथ पर्यावरण और विस्थापन का मुद्दा
जनसुनवाई में कुछ लोगों ने खदान विस्तार को रोजगार और क्षेत्रीय विकास से जोड़ते हुए समर्थन किया, वहीं प्रभावित परिवारों ने विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरण से जुड़े सवाल उठाए। कुछ लोगों ने पर्याप्त समय नहीं दिए जाने की शिकायत भी की। अब लिखित और मौखिक रूप से दर्ज आपत्तियों को आगामी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। हालांकि जनसुनवाई से सबसे स्पष्ट संदेश यही रहा कि प्रभावित ग्रामीण नए विस्तार से पहले पुराने विस्थापन का समाधान चाहते हैं।
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