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दतिया के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 16 महीने की कुपोषित बच्ची की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jagat Singh
स्वास्थ्य

दतिया के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 16 महीने की कुपोषित बच्ची की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh 🗓 19 अग. 2026, 01:48 PM 👁 35
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मध्यम प्रदेश के दतिया के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 5.2 किलोग्राम वजन वाली 16‑महीने की कुपोषित बच्ची नीलू की उल्टी‑दस्त के बाद मौत हो गई, जिससे स्वास्थ्य व पोषण व्यवस्था पर सवाल उठे।

मध्यम प्रदेश के दतिया के सलैया पमार आदिवासी डेरा में 5.2 किलोग्राम वजन वाली 16‑महीने की बच्ची नीलू ने उल्टी‑दस्त के बाद जीवन खो दिया। बच्ची को जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ डॉक्टरों ने उपचार किया, परन्तु वह बच नहीं सकी।

स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि नीलू को गंभीर कुपोषण का सामना था, जिससे वह संक्रमण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील थी। उसका कम वजन और तेज़ी से बिगड़ते जठरांत्रीय लक्षण उसकी नाजुक स्थिति को दर्शाते हैं।

इस मौत ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व पोषण व्यवस्था पर तीव्र प्रश्न उठाए हैं। समुदाय के लोग और स्वास्थ्य कार्यकर्ता यह पूछ रहे हैं कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) जैसी योजनाएँ दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में सबसे कमजोर परिवारों तक पहुँच रही हैं या नहीं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश में बाल कुपोषण की दर अभी भी उच्च है, और यह घटना ट्राइबल डेरों में निगरानी, समय पर पोषण सप्लीमेंट और चिकित्सा सुविधा की पहुँच को सुदृढ़ करने की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करती है।
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