📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Wikimedia Commons
राजनीति
महाराष्ट्र के विधायक रोहित पवार ने 3 करोड़ मतदाताओं के हटाए जाने का आरोप लगाया
✍️ The Hindu
🗓 28 सित. 2026, 11:17 AM
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विधायक रोहित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र के स्टेट इंटीग्रेटेड रजिस्टर से लगभग 3 करोड़ मतदाताओं को हटाया गया हो सकता है, जिससे मतसूची की शुद्धता पर सवाल उठे हैं।
महाराष्ट्र के विधायक रोहित पवार ने कहा है कि राज्य के स्टेट इंटीग्रेटेड रजिस्टर (SIR) से लगभग 3 करोड़ योग्य मतदाताओं के रिकॉर्ड हटाए जा सकते हैं। यह आरोप द हिन्दू ने प्रकाशित किया है और यह दर्शाता है कि मतसूची में कोई बड़ी त्रुटि या हटाव हुआ हो सकता है, जो आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है।
पवार ने अभी तक इस दावे के समर्थन में कोई विस्तृत प्रमाण नहीं दिया, पर उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से तुरंत रजिस्टर का ऑडिट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि इस पैमाने पर मतदाता हटाए गए हैं, तो इससे जनता का चुनावी प्रक्रिया में भरोसा कम हो सकता है और कई मतदाता disenfranchised हो सकते हैं।
अब तक निर्वाचन आयोग ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आम तौर पर आयोग मतसूची को साफ‑सुथरा रखने के लिये डुप्लिकेट या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाता है, पर 3 करोड़ का हटाव अब तक का सबसे बड़ा मामला होगा। राजनीतिक दल और नागरिक समाज इस मुद्दे को करीब से देख रहे हैं।
यदि यह आरोप सत्य पाया जाता है, तो अगले राज्य या राष्ट्रीय चुनावों से पहले कानूनी चुनौती और सुधारात्मक कदमों की संभावना बढ़ जाएगी। वर्तमान में यह मामला जांच के अधीन है और अधिकारियों से SIR को अपडेट करने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्टता मांगी गई है।
यह विकास भारत में चुनावी पारदर्शिता के बारे में चल रहे बहस में नया मोड़ जोड़ता है, जहाँ सटीक मतदाता सूची एक मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिये अनिवार्य है।
पवार ने अभी तक इस दावे के समर्थन में कोई विस्तृत प्रमाण नहीं दिया, पर उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से तुरंत रजिस्टर का ऑडिट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि इस पैमाने पर मतदाता हटाए गए हैं, तो इससे जनता का चुनावी प्रक्रिया में भरोसा कम हो सकता है और कई मतदाता disenfranchised हो सकते हैं।
अब तक निर्वाचन आयोग ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। आम तौर पर आयोग मतसूची को साफ‑सुथरा रखने के लिये डुप्लिकेट या अयोग्य प्रविष्टियों को हटाता है, पर 3 करोड़ का हटाव अब तक का सबसे बड़ा मामला होगा। राजनीतिक दल और नागरिक समाज इस मुद्दे को करीब से देख रहे हैं।
यदि यह आरोप सत्य पाया जाता है, तो अगले राज्य या राष्ट्रीय चुनावों से पहले कानूनी चुनौती और सुधारात्मक कदमों की संभावना बढ़ जाएगी। वर्तमान में यह मामला जांच के अधीन है और अधिकारियों से SIR को अपडेट करने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्टता मांगी गई है।
यह विकास भारत में चुनावी पारदर्शिता के बारे में चल रहे बहस में नया मोड़ जोड़ता है, जहाँ सटीक मतदाता सूची एक मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिये अनिवार्य है।