📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
धर्म
महाराष्ट्र मंत्री ने नवरात्रि कार्यक्रमों से मुस्लिमों को बाहर रखने की वीएचपी की मांग का समर्थन किया
✍️ Mangalore Today
🗓 08 सित. 2026, 01:39 PM
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एक वरिष्ठ महाराष्ट्र मंत्री ने ‘लव जिहाद’ का हवाला देते हुए, नवरात्रि समारोहों में मुस्लिमों को भाग लेने से रोकने की वीएचपी की मांग का समर्थन किया।
महाराष्ट्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने हाल ही में "लव जिहाद" का हवाला देते हुए, नवरात्रि उत्सवों से मुस्लिमों को बाहर रखने की इच्छा व्यक्त की और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के इस आह्वान का समर्थन किया। यह बयान उन साम्प्रदायिक बहसों के बीच आया है, जहाँ वीएचपी ने मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को रोकने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि इससे अंतरधार्मिक विवाहों की संभावना बढ़ेगी।
वीएचपी ने इस मुद्दे को "लव जिहाद" के रूप में लेबल किया है और नवरात्रि के दौरान मुस्लिमों को भाग लेने से रोकने की मांग की है। मंत्री का समर्थन इस मांग को राजनीतिक ताकत प्रदान करता है, परन्तु अब तक इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए कोई विधायी प्रस्ताव नहीं आया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान त्योहार के मौसम में बढ़ती साम्प्रदायिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है, लेकिन किसी भी समुदाय को बाहर करने की कोशिश संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के तहत कानूनी चुनौती का सामना कर सकती है। राज्य सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं जारी किया है और स्थानीय प्राधिकरण सार्वजनिक समारोहों की सुरक्षा और समावेशिता सुनिश्चित करने का आश्वासन दे रहे हैं।
यह घटना धार्मिक मामलों में सरकार की भूमिका पर चल रही बहस को और तीव्र कर रही है, जबकि नागरिक समाज के समूह तनाव कम करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर ज़ोर दे रहे हैं, न कि किसी विशेष समुदाय को बाहर करने पर।
वीएचपी ने इस मुद्दे को "लव जिहाद" के रूप में लेबल किया है और नवरात्रि के दौरान मुस्लिमों को भाग लेने से रोकने की मांग की है। मंत्री का समर्थन इस मांग को राजनीतिक ताकत प्रदान करता है, परन्तु अब तक इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए कोई विधायी प्रस्ताव नहीं आया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान त्योहार के मौसम में बढ़ती साम्प्रदायिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है, लेकिन किसी भी समुदाय को बाहर करने की कोशिश संविधान के धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के तहत कानूनी चुनौती का सामना कर सकती है। राज्य सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं जारी किया है और स्थानीय प्राधिकरण सार्वजनिक समारोहों की सुरक्षा और समावेशिता सुनिश्चित करने का आश्वासन दे रहे हैं।
यह घटना धार्मिक मामलों में सरकार की भूमिका पर चल रही बहस को और तीव्र कर रही है, जबकि नागरिक समाज के समूह तनाव कम करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर ज़ोर दे रहे हैं, न कि किसी विशेष समुदाय को बाहर करने पर।