📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Jorge Royan
राजनीति
महाराष्ट्र FDA प्रमुख ने टुकाराम मुंढे के राजनैतिक कदमों की अटकलों पर टिप्पणी की
✍️ India Today
🗓 22 अग. 2026, 02:36 PM
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महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर, जिन्हें ‘सिंगह’ के नाम से जाना जाता है, ने टुकाराम मुंढे के संभावित राजनैतिक कदमों की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे निजी निर्णयों पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
महाराष्ट्र के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर, जिन्हें अक्सर 'सिंगह' कहा जाता है, ने टुकाराम मुंढे के संभावित राजनैतिक कदमों के बारे में मीडिया में फैली अटकलों पर टिप्पणी की। उन्होंने इन अफवाहों को स्वीकार किया, परंतु मुंढे की संभावित राजनीतिक आकांक्षाओं के संबंध में कोई विवरण या समर्थन नहीं दिया।
टुकाराम मुंढे, जो पहले राज्य की दवा नियामक संस्था में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे, के चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की खबरें सामने आई थीं। जबकि FDA के प्रमुख ने इन दावों की पुष्टि या खंडन नहीं किया, उन्होंने बताया कि विभाग अपने नियामक कार्यों पर केंद्रित रहेगा।
टुकाराम मुंढे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और महाराष्ट्र सरकार ने भी किसी नियुक्ति या उम्मीदवार घोषणा नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक सरकारी अधिकारी से सक्रिय राजनीति में कदम रखने के लिए राज्य की सेवा नियमों और ठंडा‑ऑफ़ अवधि का पालन आवश्यक है।
कमिश्नर की इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि नौकरशाहों के राजनैतिक क्षेत्र में प्रवेश को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है, जो कई भारतीय राज्यों में सार्वजनिक रुचि का विषय रहा है।
टुकाराम मुंढे, जो पहले राज्य की दवा नियामक संस्था में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे, के चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की खबरें सामने आई थीं। जबकि FDA के प्रमुख ने इन दावों की पुष्टि या खंडन नहीं किया, उन्होंने बताया कि विभाग अपने नियामक कार्यों पर केंद्रित रहेगा।
टुकाराम मुंढे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और महाराष्ट्र सरकार ने भी किसी नियुक्ति या उम्मीदवार घोषणा नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक सरकारी अधिकारी से सक्रिय राजनीति में कदम रखने के लिए राज्य की सेवा नियमों और ठंडा‑ऑफ़ अवधि का पालन आवश्यक है।
कमिश्नर की इस संक्षिप्त प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि नौकरशाहों के राजनैतिक क्षेत्र में प्रवेश को लेकर संवेदनशीलता बनी हुई है, जो कई भारतीय राज्यों में सार्वजनिक रुचि का विषय रहा है।