महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की पुण्यतिथि पर साहित्य जगत ने किया स्मरण
हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी रचनाओं को साहित्य जगत की अमूल्य निधि बताया गया।
हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के महान स्तंभ, महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर साहित्य जगत ने उनके योगदान को याद किया।
'निराला' जी को माँ सरस्वती का वरद पुत्र बताते हुए उनकी रचनाओं को साहित्य जगत की अमूल्य निधि करार दिया गया। यह कहा गया कि उनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय को अप्रतिम आनंद से आलोकित करते रहेंगे।
हिन्दी भाषा के अनन्य सेवक के रूप में महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी को बारंबार प्रणाम किया गया। उनकी साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
'निराला' जी को माँ सरस्वती का वरद पुत्र बताते हुए उनकी रचनाओं को साहित्य जगत की अमूल्य निधि करार दिया गया। यह कहा गया कि उनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय को अप्रतिम आनंद से आलोकित करते रहेंगे।
हिन्दी भाषा के अनन्य सेवक के रूप में महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी को बारंबार प्रणाम किया गया। उनकी साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।