स्थानीय
मगही महोत्सव में सिक्किम की IAS अधिकारी छिरिड़ बाई भूटिया ने मगही में संबोधन कर जीता मगधवासियों का दिल
जहानाबाद में आयोजित मगही महोत्सव 2026 में सिक्किम की IAS अधिकारी छिरिड़ बाई भूटिया ने मगही भाषा में संबोधन देकर स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। उनके 'जय मगध, जय मगही' के उद्घोष से पूरा मैदान गूंज उठा।
जहानाबाद। मगही भाषा, संस्कृति और परंपरा के सम्मान में आयोजित मगही महोत्सव 2026 में जहानाबाद की जिलाधिकारी छिरिड़ बाई भूटिया ने अपने अनोखे अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया। सिक्किम की रहने वाली आईएएस अधिकारी ने जब मंच से मगही में ‘जय मगध, जय मगही’ का उद्घोष किया, तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
महोत्सव में जिलाधिकारी का मगही भाषा में संबोधन लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “आज के इस अवसर पर मगही महोत्सव 2026 में सभी के हार्दिक स्वागत और अभिनंदन दई। हमरा बहुत खुशी हो रहल है कि हमनी आज अपन मगही भाषा, मगध के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, परंपरा और साहित्य के उत्सव मनावे खातिर एक जगह जुटली हइ।”
उनके इस आत्मीय संबोधन ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। मगही में सहजता से अपनी बात रखकर उन्होंने स्थानीय भाषा के प्रति सम्मान और जुड़ाव का संदेश दिया। उनके संबोधन के दौरान बार-बार तालियों की गूंज सुनाई दी।
आमतौर पर अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों से आने वाले लोगों के उच्चारण को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी रहती हैं, लेकिन जिलाधिकारी छिरिड़ बाई भूटिया ने मगही में बोलकर इन धारणाओं से परे अपनी अलग पहचान बनाई। उनके इस प्रयास को मगध की भाषा, संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
मगही महोत्सव के मंच से दिया गया उनका संदेश यह दर्शाता है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर भी है। जिलाधिकारी के ‘जय मगध, जय मगही’ के उद्घोष ने महोत्सव में मौजूद लोगों के बीच उत्साह और गौरव का माहौल बना दिया।
महोत्सव में जिलाधिकारी का मगही भाषा में संबोधन लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “आज के इस अवसर पर मगही महोत्सव 2026 में सभी के हार्दिक स्वागत और अभिनंदन दई। हमरा बहुत खुशी हो रहल है कि हमनी आज अपन मगही भाषा, मगध के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, परंपरा और साहित्य के उत्सव मनावे खातिर एक जगह जुटली हइ।”
उनके इस आत्मीय संबोधन ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। मगही में सहजता से अपनी बात रखकर उन्होंने स्थानीय भाषा के प्रति सम्मान और जुड़ाव का संदेश दिया। उनके संबोधन के दौरान बार-बार तालियों की गूंज सुनाई दी।
आमतौर पर अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों से आने वाले लोगों के उच्चारण को लेकर कई तरह की धारणाएं बनी रहती हैं, लेकिन जिलाधिकारी छिरिड़ बाई भूटिया ने मगही में बोलकर इन धारणाओं से परे अपनी अलग पहचान बनाई। उनके इस प्रयास को मगध की भाषा, संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
मगही महोत्सव के मंच से दिया गया उनका संदेश यह दर्शाता है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर भी है। जिलाधिकारी के ‘जय मगध, जय मगही’ के उद्घोष ने महोत्सव में मौजूद लोगों के बीच उत्साह और गौरव का माहौल बना दिया।