मुफ्त राशन के लिए मोबाइल खरीदना जरूरी नहीं, आधार प्रमाणीकरण के कई विकल्प उपलब्ध।*
अमेठी। जिला पूर्ति अधिकारी शशिकांत ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में निःशुल्क खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए किसी भी राशनकार्ड धारक को मोबाइल फोन खरीदने की आवश्यकता नहीं है। मोबाइल ओटीपी आधारित खाद्यान्न वितरण की सुविधा केवल उन पात्र लाभार्थियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध कराई गई है, जिनका किसी भी कारण से आधार प्रमाणीकरण संभव नहीं हो पाता है और जिनका मोबाइल नंबर विभागीय पोर्टल पर पहले से पंजीकृत है।
उन्होंने बताया कि उचित दर दुकानों पर ई-पॉस मशीन से आधार प्रमाणीकरण कराकर लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित किया जाता है। बायोमेट्रिक मिलान असफल होने पर लाभार्थी को दोबारा प्रयास करने की सुविधा मिलती है। तीन बार बायोमेट्रिक मिलान असफल होने पर आइरिस स्कैन के माध्यम से प्रमाणीकरण का प्रयास किया जाता है। यदि इससे भी सफलता नहीं मिलती है, तो उसी राशनकार्ड में शामिल कोई अन्य सदस्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि वृद्धावस्था, दिव्यांगता अथवा कुष्ठ रोग जैसी परिस्थितियों में बायोमेट्रिक या आइरिस स्कैन कराने में असमर्थ लाभार्थियों को ध्यान में रखते हुए वितरण चक्र के अंतिम दिन मोबाइल ओटीपी आधारित वितरण की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2017 से लगातार संचालित है, न कि कोई नई व्यवस्था है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सितंबर 2026 में प्रदेश में कुल 3,41,69,420 राशनकार्डों पर खाद्यान्न वितरण हुआ, जबकि इनमें से केवल 83,093 राशनकार्डों पर ओटीपी आधारित वितरण किया गया। उन्होंने पात्र लाभार्थियों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं से बचें और निःशुल्क खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए मोबाइल खरीदने की आवश्यकता संबंधी भ्रम में बिल्कुल न पड़ें।
नीड 24 उल्लखित आरोपों की स्वतंत्र से पुष्टि नहीं करता
उन्होंने बताया कि उचित दर दुकानों पर ई-पॉस मशीन से आधार प्रमाणीकरण कराकर लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित किया जाता है। बायोमेट्रिक मिलान असफल होने पर लाभार्थी को दोबारा प्रयास करने की सुविधा मिलती है। तीन बार बायोमेट्रिक मिलान असफल होने पर आइरिस स्कैन के माध्यम से प्रमाणीकरण का प्रयास किया जाता है। यदि इससे भी सफलता नहीं मिलती है, तो उसी राशनकार्ड में शामिल कोई अन्य सदस्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है।
जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि वृद्धावस्था, दिव्यांगता अथवा कुष्ठ रोग जैसी परिस्थितियों में बायोमेट्रिक या आइरिस स्कैन कराने में असमर्थ लाभार्थियों को ध्यान में रखते हुए वितरण चक्र के अंतिम दिन मोबाइल ओटीपी आधारित वितरण की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2017 से लगातार संचालित है, न कि कोई नई व्यवस्था है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सितंबर 2026 में प्रदेश में कुल 3,41,69,420 राशनकार्डों पर खाद्यान्न वितरण हुआ, जबकि इनमें से केवल 83,093 राशनकार्डों पर ओटीपी आधारित वितरण किया गया। उन्होंने पात्र लाभार्थियों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सूचनाओं से बचें और निःशुल्क खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए मोबाइल खरीदने की आवश्यकता संबंधी भ्रम में बिल्कुल न पड़ें।
नीड 24 उल्लखित आरोपों की स्वतंत्र से पुष्टि नहीं करता