📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
सरकारी योजना
मध्यप्रदेश स्वामित्व योजना: धनतेरस पर मंत्री‑विधायक करेंगे पात्र ग्रामीणों की रजिस्ट्री
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 02 नव. 2026, 09:31 AM
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धनतेरस को मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री‑विधायक गांवों में जाकर पट्टे पर रहने वाले पात्र ग्रामीणों को मुफ्त पक्की रजिस्ट्री कराकर मालिक बना देंगे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई स्वामित्व योजना का उद्देश्य उन ग्रामीण परिवारों को कानूनी मालिकाना हक देना है जो वर्तमान में घर या प्लॉट पट्टे पर रखे हुए हैं। इस योजना के तहत पक्की रजिस्ट्री का पूरा खर्च सरकार उठाएगी, जिससे अनौपचारिक कब्जे को आधिकारिक संपत्ति में बदला जाएगा।
धनतेरस के अवसर पर राज्य सरकार ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है, जिसमें मंत्रियों और विधायक दल का समूह चयनित गांवों में जाकर पात्र परिवारों की पहचान करेगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया को तुरंत पूरा करेगा। इस दौरान कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और लाभार्थियों को प्रमाणित स्वामित्व प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
पात्रता मानदंड में उन घरों या प्लॉटों के किरायेदार शामिल हैं जो निर्धारित अवधि से अधिक समय से वहाँ रह रहे हैं। सत्यापन के बाद सरकार पक्की रजिस्ट्री जारी करेगी, जिससे लाभार्थी ऋण प्राप्त करने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भूमि विवादों से बचने में सक्षम होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि सभी रजिस्ट्री को राज्य के भूमि‑रिकॉर्ड पोर्टल में दर्ज किया जाएगा, जिससे वास्तविक‑समय में निगरानी और सत्यापन संभव होगा। लाभार्थियों को फील्ड विजिट के कुछ हफ्तों के भीतर स्वामित्व प्रमाणपत्र मिलने की उम्मीद है।
यह कदम ग्रामीण मध्यप्रदेश में भूमि सुरक्षा को सुदृढ़ करने, वित्तीय समावेशन बढ़ाने और अनौपचारिक बस्तियों की संख्या घटाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
धनतेरस के अवसर पर राज्य सरकार ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है, जिसमें मंत्रियों और विधायक दल का समूह चयनित गांवों में जाकर पात्र परिवारों की पहचान करेगा और रजिस्ट्री प्रक्रिया को तुरंत पूरा करेगा। इस दौरान कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और लाभार्थियों को प्रमाणित स्वामित्व प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
पात्रता मानदंड में उन घरों या प्लॉटों के किरायेदार शामिल हैं जो निर्धारित अवधि से अधिक समय से वहाँ रह रहे हैं। सत्यापन के बाद सरकार पक्की रजिस्ट्री जारी करेगी, जिससे लाभार्थी ऋण प्राप्त करने, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भूमि विवादों से बचने में सक्षम होंगे।
अधिकारियों ने बताया कि सभी रजिस्ट्री को राज्य के भूमि‑रिकॉर्ड पोर्टल में दर्ज किया जाएगा, जिससे वास्तविक‑समय में निगरानी और सत्यापन संभव होगा। लाभार्थियों को फील्ड विजिट के कुछ हफ्तों के भीतर स्वामित्व प्रमाणपत्र मिलने की उम्मीद है।
यह कदम ग्रामीण मध्यप्रदेश में भूमि सुरक्षा को सुदृढ़ करने, वित्तीय समावेशन बढ़ाने और अनौपचारिक बस्तियों की संख्या घटाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।