📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Singhbrarraj636
कृषि
मध्य प्रदेश में धान के अवशेष जलाने की घटनाएँ सबसे अधिक
✍️ BusinessLine
🗓 17 अक्टू. 2026, 06:06 AM
👁 14
एक नवीन कृषि रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में धान के अवशेष जलाने की घटनाएँ सबसे अधिक हैं, जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में गिरावट देखी गई है।
मंत्रालय द्वारा जारी एक नई कृषि सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश ने हालिया फसल मौसम में धान के अवशेष को खुले में जलाने की घटनाओं में राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्थान प्राप्त किया है। उपग्रह निगरानी और जमीनी रिपोर्टों को मिलाकर तैयार किए गए इस डेटा में राज्य को इस सूची के शीर्ष पर रखा गया है।
रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान अगले बुवाई चक्र के लिए धान की भूसी को जलाकर खेत साफ़ करने की प्रक्रिया अपनाते हैं। पर्यावरण संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस धुएँ से विशेषकर सर्दियों में वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आती है।
जबकि मध्य प्रदेश शीर्ष पर है, वही सर्वेक्षण हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अवशेष जलाने की घटनाओं में गिरावट दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में अपनाए गए रोकथाम उपाय प्रभावी हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के अधिकारियों से अपील की गई है कि वे जागरूकता अभियानों को तेज़ करें और मल्चिंग, कंपोस्टिंग तथा हैप्पी सीडर जैसी वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा दें।
मंत्रालय ने उन किसानों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन देने का वादा किया है जो प्रमाणित अवशेष‑प्रबंधन उपाय अपनाते हैं, ताकि खुले में जलाने के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव को राष्ट्रीय स्तर पर कम किया जा सके।
रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान अगले बुवाई चक्र के लिए धान की भूसी को जलाकर खेत साफ़ करने की प्रक्रिया अपनाते हैं। पर्यावरण संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस धुएँ से विशेषकर सर्दियों में वायु गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आती है।
जबकि मध्य प्रदेश शीर्ष पर है, वही सर्वेक्षण हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अवशेष जलाने की घटनाओं में गिरावट दर्शाता है, जिससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में अपनाए गए रोकथाम उपाय प्रभावी हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के अधिकारियों से अपील की गई है कि वे जागरूकता अभियानों को तेज़ करें और मल्चिंग, कंपोस्टिंग तथा हैप्पी सीडर जैसी वैकल्पिक अवशेष प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा दें।
मंत्रालय ने उन किसानों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन देने का वादा किया है जो प्रमाणित अवशेष‑प्रबंधन उपाय अपनाते हैं, ताकि खुले में जलाने के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभाव को राष्ट्रीय स्तर पर कम किया जा सके।