📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Yann Forget
अपराध
मध्य प्रदेश में चार फर्मों के कंप्यूटर घोटाले की जाँच
✍️ The Indian Express
🗓 10 सित. 2026, 05:03 PM
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राज्य सरकार ने चार कंपनियों के बीच जुड़ी एक घोटाले की जाँच शुरू की है, जहाँ पुराने कंप्यूटरों को अधिक कीमतों पर बेचा गया बताया जा रहा है।
मध्य प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने हाल ही में सरकारी दफ्तरों के लिए कंप्यूटर हार्डवेयर की खरीद में संभावित अनियमितता की जाँच शुरू कर दी है। जांच का केंद्र चार कंपनियों पर है, जिनका नियंत्रण एक ही इकाई के पास है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन फर्मों ने कई साल पुराने कंप्यूटर बेचे, जबकि खरीद आदेशों में नई मशीनों के समान कीमतें लिखी गई थीं। इस अंतर ने राज्य को वित्तीय नुकसान का जोखिम पैदा किया है।
राज्य के भ्रष्टाचार विरोधी सेल ने इस मामले की गहराई से पड़ताल करने का आदेश दिया है, जिसमें निविदा दस्तावेज़, भुगतान रिकॉर्ड और कंपनियों की स्वामित्व संरचना की जांच शामिल होगी। जिम्मेदार पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
जांच के परिणाम आने तक प्रभावित कंपनियों से आगे की कोई खरीदारी रोक दी गई है और अन्य विभागों को भी अपनी खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला कई राज्यों में हालिया खरीद विवादों की श्रृंखला में नया जोड़ है, जिससे पारदर्शी बोली प्रक्रिया और कड़ी निगरानी की मांग बढ़ रही है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन फर्मों ने कई साल पुराने कंप्यूटर बेचे, जबकि खरीद आदेशों में नई मशीनों के समान कीमतें लिखी गई थीं। इस अंतर ने राज्य को वित्तीय नुकसान का जोखिम पैदा किया है।
राज्य के भ्रष्टाचार विरोधी सेल ने इस मामले की गहराई से पड़ताल करने का आदेश दिया है, जिसमें निविदा दस्तावेज़, भुगतान रिकॉर्ड और कंपनियों की स्वामित्व संरचना की जांच शामिल होगी। जिम्मेदार पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
जांच के परिणाम आने तक प्रभावित कंपनियों से आगे की कोई खरीदारी रोक दी गई है और अन्य विभागों को भी अपनी खरीद प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
यह मामला कई राज्यों में हालिया खरीद विवादों की श्रृंखला में नया जोड़ है, जिससे पारदर्शी बोली प्रक्रिया और कड़ी निगरानी की मांग बढ़ रही है।