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स्वास्थ्य
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा, देर से मेडिकल जांच से स्थायी विकलांगता साक्ष्य रद्द नहीं
✍️ Live Law
🗓 07 अक्टू. 2026, 03:36 AM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला किया कि देर से की गई मेडिकल जांच से स्थायी विकलांगता के साक्ष्य को खारिज नहीं किया जा सकता।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हालिया फैसले में कहा कि मेडिकल जांच में देरी होने से स्थायी विकलांगता के प्रमाण को स्वचालित रूप से खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुख्य मुद्दा दीर्घकालिक विकलांगता की मौजूदगी है, न कि जांच के समय पर।
न्यायालय ने कहा कि प्रक्रिया संबंधी चूकों को तथ्यात्मक निर्धारण पर हावी नहीं होने देना चाहिए और प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उपलब्ध चिकित्सा साक्ष्य के आधार पर किया जाना चाहिए, चाहे जांच बाद में ही क्यों न की गई हो।
वकीलों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में विकलांगता से जुड़े मुकदमों में मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे दावेदारों को देर से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट के कारण नुकसान नहीं हो सकेगा। यह ruling मौजूदा विकलांगता अधिकार कानूनों के साथ संगत है, जो यह सिद्धांत स्थापित करता है कि साक्ष्य की वैधता प्रक्रिया की देरी से प्रभावित नहीं होती।
न्यायालय ने कहा कि प्रक्रिया संबंधी चूकों को तथ्यात्मक निर्धारण पर हावी नहीं होने देना चाहिए और प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उपलब्ध चिकित्सा साक्ष्य के आधार पर किया जाना चाहिए, चाहे जांच बाद में ही क्यों न की गई हो।
वकीलों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में विकलांगता से जुड़े मुकदमों में मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे दावेदारों को देर से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट के कारण नुकसान नहीं हो सकेगा। यह ruling मौजूदा विकलांगता अधिकार कानूनों के साथ संगत है, जो यह सिद्धांत स्थापित करता है कि साक्ष्य की वैधता प्रक्रिया की देरी से प्रभावित नहीं होती।