📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendrasinghchauha…
अपराध
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लेपर्ड पॉयजिंग मामले में वाइल्डलाइफ़ एसओएस प्रमुख की सुरक्षा हटाई
✍️ indianexpress.com
🗓 10 सित. 2026, 08:39 PM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लेपर्ड पॉयजिंग जांच से जुड़े कारणों को देखते हुए वाइल्डलाइफ़ एसओएस प्रमुख को दी गई अदालत‑आधारित सुरक्षा को हटा दिया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंगलवार को वाइल्डलाइफ़ एसओएस के प्रमुख को दी गई सुरक्षा आदेश को रद्द कर दिया। यह कदम लेपर्ड पॉयजिंग की जांच के संदर्भ में लिया गया है, जिसमें पर्यावरण कार्यकर्ताओं और पुलिस दोनों की रुचि है।
अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, प्रारंभ में इस सुरक्षा को जांच के दौरान संभावित दबाव या धमकी से बचाने के लिए दिया गया था। लेकिन अब न्यायालय ने कहा कि परिस्थितियाँ अब ऐसी नहीं रही कि विशेष सुरक्षा जारी रखी जाए, और मामले की पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया आवश्यक है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यह दर्शाता है कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख व्यक्तियों को भी अवैध शिकार के आरोपों में जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। जांच जारी है और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस, जो वन्यजीव बचाव और पुनर्वास में कार्यरत एक प्रमुख संस्था है, ने इस आदेश पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। यह मामला मध्य भारत में बढ़ते अवैध वन्यजीव व्यापार की चुनौतियों को उजागर करता है, जहाँ लेपर्ड के फर और अंगों की माँग में वृद्धि देखी जा रही है।
हाई कोर्ट का यह आदेश किसी दोषसिद्धि को दर्शाता नहीं है, बल्कि विशेष सुरक्षा को हटाकर सामान्य कानूनी प्रक्रिया को बिना अतिरिक्त सुरक्षा के आगे बढ़ने देता है।
अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, प्रारंभ में इस सुरक्षा को जांच के दौरान संभावित दबाव या धमकी से बचाने के लिए दिया गया था। लेकिन अब न्यायालय ने कहा कि परिस्थितियाँ अब ऐसी नहीं रही कि विशेष सुरक्षा जारी रखी जाए, और मामले की पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया आवश्यक है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय यह दर्शाता है कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख व्यक्तियों को भी अवैध शिकार के आरोपों में जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। जांच जारी है और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
वाइल्डलाइफ़ एसओएस, जो वन्यजीव बचाव और पुनर्वास में कार्यरत एक प्रमुख संस्था है, ने इस आदेश पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। यह मामला मध्य भारत में बढ़ते अवैध वन्यजीव व्यापार की चुनौतियों को उजागर करता है, जहाँ लेपर्ड के फर और अंगों की माँग में वृद्धि देखी जा रही है।
हाई कोर्ट का यह आदेश किसी दोषसिद्धि को दर्शाता नहीं है, बल्कि विशेष सुरक्षा को हटाकर सामान्य कानूनी प्रक्रिया को बिना अतिरिक्त सुरक्षा के आगे बढ़ने देता है।