📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
स्थानीय
एमपी हाई कोर्ट ने केन‑बेतवा लिंक परियोजना पर 60 लाख पेड़ों की कटाई के दावे के बीच सीईसी रिपोर्ट मांगी
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 10 अक्टू. 2026, 07:01 AM
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केन‑बेतवा लिंक परियोजना की पर्यावरणीय रिपोर्ट के लिए केंद्र से सीईसी का मूल्यांकन माँगा है, क्योंकि याचिका में 60 लाख पेड़ों की कटाई और पन्ना टाइगर रिज़र्व व केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित असर का दावा किया गया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्र को केन‑बेतवा लिंक परियोजना पर केंद्र सशक्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक सार्वजनिक हित याचिका के बाद आया है, जिसमें लगभग 60 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान लगाया गया है और पर्यावरणीय जोखिमों को उजागर किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि प्रस्तावित जल‑स्थानांतरण संरचना पन्ना टाइगर रिज़र्व और केन घड़ियाल अभयारण्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती है, जिससे बाघ, घड़ियाल और अन्य वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है।
कोर्ट ने सीईसी की रिपोर्ट की जांच के लिए अगली सुनवाई निर्धारित की है और यह तय करेगा कि परियोजना पर्यावरणीय मंजूरी और सामाजिक सुरक्षा मानदंडों को पूरा करती है या नहीं। रिपोर्ट की समीक्षा से पहले परियोजना के आगे बढ़ने का कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।
पर्यावरण संगठनों और स्थानीय समुदायों को आगामी कार्यवाही में अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है। इस निर्णय का असर बहु‑अरब रुपये मूल्य की जल‑लिंक योजना के भविष्य पर पड़ेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति बढ़ाना है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि प्रस्तावित जल‑स्थानांतरण संरचना पन्ना टाइगर रिज़र्व और केन घड़ियाल अभयारण्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश कर सकती है, जिससे बाघ, घड़ियाल और अन्य वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है।
कोर्ट ने सीईसी की रिपोर्ट की जांच के लिए अगली सुनवाई निर्धारित की है और यह तय करेगा कि परियोजना पर्यावरणीय मंजूरी और सामाजिक सुरक्षा मानदंडों को पूरा करती है या नहीं। रिपोर्ट की समीक्षा से पहले परियोजना के आगे बढ़ने का कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।
पर्यावरण संगठनों और स्थानीय समुदायों को आगामी कार्यवाही में अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने का आग्रह किया गया है। इस निर्णय का असर बहु‑अरब रुपये मूल्य की जल‑लिंक योजना के भविष्य पर पड़ेगा, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति बढ़ाना है।