📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Consumer Affairs, Food and Public Dist
राजनीति
एमपी सरकार ने मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस नहीं चलाने का फैसला किया
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 01 सित. 2026, 10:36 AM
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मध्य प्रदेश सरकार ने कर्नल सोफिया कुरैशी के मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन को मंजूरी नहीं देने का फैसला किया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई आपराधिक अभियोजन मंजूर नहीं किया, यह बात भोपाल के स्रोतों ने बताई। कैबिनेट को प्रस्तुत केस फ़ाइल की समीक्षा के बाद, आरोप दर्ज करने की स्वीकृति वापस ले ली गई।
कर्नल सोफिया कुरैशी के मामले को सार्वजनिक ध्यान मिला है, जिसमें अधिकारी के खिलाफ एक विवादास्पद घटना के आरोप लगे हैं। जांच के विवरण गोपनीय रहे हैं, पर शाह के खिलाफ कदम न उठाने से राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।
विपक्षी कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी निंदा की, सरकार पर अपने ही सदस्य को बचाने और क़ानून के शासन को कमजोर करने का आरोप लगाया। राज्य सभा में पार्टी के नेताओं ने इसे "राजनीतिक बलिदान" कहा, जो मंत्री को सुरक्षित रखने के लिए किया गया है।
सरकारी अधिकारियों ने इस निर्णय का बचाव किया, यह बताया कि प्रक्रियात्मक खामियों और पर्याप्त साक्ष्य की कमी के कारण अभियोजन की सीमा नहीं बनी। उन्होंने कहा कि यदि नई जानकारी मिले तो मामला फिर से देखा जा सकता है।
अभी के लिए कोई अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, जिससे मामला अस्थायी रूप से ठहराव में है, जबकि जवाबदेही और शासन पर राजनीतिक बहस जारी है।
कर्नल सोफिया कुरैशी के मामले को सार्वजनिक ध्यान मिला है, जिसमें अधिकारी के खिलाफ एक विवादास्पद घटना के आरोप लगे हैं। जांच के विवरण गोपनीय रहे हैं, पर शाह के खिलाफ कदम न उठाने से राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है।
विपक्षी कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी निंदा की, सरकार पर अपने ही सदस्य को बचाने और क़ानून के शासन को कमजोर करने का आरोप लगाया। राज्य सभा में पार्टी के नेताओं ने इसे "राजनीतिक बलिदान" कहा, जो मंत्री को सुरक्षित रखने के लिए किया गया है।
सरकारी अधिकारियों ने इस निर्णय का बचाव किया, यह बताया कि प्रक्रियात्मक खामियों और पर्याप्त साक्ष्य की कमी के कारण अभियोजन की सीमा नहीं बनी। उन्होंने कहा कि यदि नई जानकारी मिले तो मामला फिर से देखा जा सकता है।
अभी के लिए कोई अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, जिससे मामला अस्थायी रूप से ठहराव में है, जबकि जवाबदेही और शासन पर राजनीतिक बहस जारी है।