📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumit Surai
सरकारी योजना
मध्य प्रदेश ने 47 साल बाद नर्मदा के पूरे जल हिस्से को 2031 तक उपयोग करने का लक्ष्य रखा
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 02 सित. 2026, 08:36 PM
👁 36
47 साल पहले नर्मदा के जल हिस्से को मिला था मध्य प्रदेश, लेकिन अब तक केवल आधे से थोड़ा अधिक ही उपयोग किया गया; राज्य 2031 तक शेष जल को पूरी तरह इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया है कि 1976 में नर्मदा नदी के जल हिस्से को मिलने के बाद से अब तक केवल 50% से थोड़ा अधिक ही उपयोग किया गया है। यह कमी सीमित जलाशय क्षमता और अनियमित मानसून के कारण रही।
हालिया नीति ब्रीफ़िंग में राज्य ने 2031 तक अपने सभी जल हिस्से को पूरी तरह इस्तेमाल करने की व्यापक योजना पेश की। इस योजना में जलाशयों का विस्तार, सूखे‑प्रवण जिलों में माइक्रो‑इरिगेशन को बढ़ावा देना और मानसून के दौरान जल‑गहन फसलों को प्राथमिकता देना शामिल है।
योजना के तहत नर्मदा बांधों से जल निकासी की कड़ी निगरानी की जाएगी, और वास्तविक‑समय डेटा जल विभागों के बीच साझा किया जाएगा। सफल होने पर यह कदम मध्य भारत में कृषि उत्पादन को बढ़ा सकता है और भूजल पर निर्भरता घटा सकता है।
राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि हाल ही में नहरों के आधुनिकीकरण और किसानों में जागरूकता कार्यक्रमों में निवेश के कारण यह समय‑सीमा व्यावहारिक है। उन्होंने स्थानीय समुदायों से जल‑बचत प्रथाओं में सहयोग करने का अनुरोध किया।
यह घोषणा अन्य नदियों के हिस्सेदारी वाले राज्यों के लिए भी एक संकेत बनती है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के नदी बेसिनों पर दबाव बढ़ रहा है।
हालिया नीति ब्रीफ़िंग में राज्य ने 2031 तक अपने सभी जल हिस्से को पूरी तरह इस्तेमाल करने की व्यापक योजना पेश की। इस योजना में जलाशयों का विस्तार, सूखे‑प्रवण जिलों में माइक्रो‑इरिगेशन को बढ़ावा देना और मानसून के दौरान जल‑गहन फसलों को प्राथमिकता देना शामिल है।
योजना के तहत नर्मदा बांधों से जल निकासी की कड़ी निगरानी की जाएगी, और वास्तविक‑समय डेटा जल विभागों के बीच साझा किया जाएगा। सफल होने पर यह कदम मध्य भारत में कृषि उत्पादन को बढ़ा सकता है और भूजल पर निर्भरता घटा सकता है।
राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि हाल ही में नहरों के आधुनिकीकरण और किसानों में जागरूकता कार्यक्रमों में निवेश के कारण यह समय‑सीमा व्यावहारिक है। उन्होंने स्थानीय समुदायों से जल‑बचत प्रथाओं में सहयोग करने का अनुरोध किया।
यह घोषणा अन्य नदियों के हिस्सेदारी वाले राज्यों के लिए भी एक संकेत बनती है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के नदी बेसिनों पर दबाव बढ़ रहा है।