📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gopal Aggarwal
शिक्षा
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का 35,000 छात्रों तक विस्तार, विज्ञापन धूम के साथ
✍️ ThePrint
🗓 30 सित. 2026, 03:38 PM
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लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने एक छोटे बी‑स्कूल से 35,000 छात्रों वाला विश्वविद्यालय बनकर अपनी तीव्र विज्ञापन रणनीति से विस्तार किया है, दि प्रिंट ने बताया।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जो पहले एक छोटे बी‑स्कूल के रूप में स्थापित थी, अब लगभग 35,000 छात्रों को स्नातक, स्नातकोत्तर और प्रोफेशनल कोर्सों में पढ़ा रही है। इस तेज़ विस्तार का मुख्य कारण एक निरंतर, बड़े बजट वाला विज्ञापन अभियान है, जिसने टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और आउटडोर मीडिया में विश्वविद्यालय का ब्रांड प्रमुखता से स्थापित किया है।
दि प्रिंट के अनुसार, LPU ने 2000 के दशक की शुरुआत में विज्ञापन रणनीति अपनाई, जिसमें टियर‑2 और टियर‑3 शहरों के छात्रों को आधुनिक बुनियादी ढांचा, उद्योग‑संबंधित पाठ्यक्रम और प्लेसमेंट के वादे पेश किए गए। विश्वविद्यालय ने अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा मीडिया खरीद, प्रायोजन और सेलिब्रिटी एन्डोर्समेंट में लगाया, जिससे एक प्रीमियम, पूरे भारत में मान्यता प्राप्त शैक्षणिक ब्रांड की छवि बनी।
यह विस्तार पंजाब के फगवाड़ा में स्थित बड़े कैंपस के विकास से भी समर्थित है, जिसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, हॉस्टल और खेल सुविधाएँ शामिल हैं। जबकि विज्ञापन‑आधारित मॉडल को अधिक वादे करने के लिए आलोचना मिली है, नामांकन संख्या यह दर्शाती है कि यह दृष्टिकोण भारत के युवा छात्रों के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि LPU की कहानी निजी संस्थानों द्वारा मार्केटिंग का उपयोग करके पारंपरिक विश्वविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा करने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाती है। विश्वविद्यालय के नेतृत्व का कहना है कि विज्ञापन खर्च छात्र संख्या में वृद्धि और स्केल की अर्थव्यवस्थाओं के कारण उचित है।
दि प्रिंट की रिपोर्ट इस बात को उजागर करती है कि तीव्र ब्रांडिंग कैसे भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य को बदल सकती है, एक छोटे बी‑स्कूल को देश के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक बना दिया है।
दि प्रिंट के अनुसार, LPU ने 2000 के दशक की शुरुआत में विज्ञापन रणनीति अपनाई, जिसमें टियर‑2 और टियर‑3 शहरों के छात्रों को आधुनिक बुनियादी ढांचा, उद्योग‑संबंधित पाठ्यक्रम और प्लेसमेंट के वादे पेश किए गए। विश्वविद्यालय ने अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा मीडिया खरीद, प्रायोजन और सेलिब्रिटी एन्डोर्समेंट में लगाया, जिससे एक प्रीमियम, पूरे भारत में मान्यता प्राप्त शैक्षणिक ब्रांड की छवि बनी।
यह विस्तार पंजाब के फगवाड़ा में स्थित बड़े कैंपस के विकास से भी समर्थित है, जिसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, हॉस्टल और खेल सुविधाएँ शामिल हैं। जबकि विज्ञापन‑आधारित मॉडल को अधिक वादे करने के लिए आलोचना मिली है, नामांकन संख्या यह दर्शाती है कि यह दृष्टिकोण भारत के युवा छात्रों के एक बड़े वर्ग को आकर्षित करता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि LPU की कहानी निजी संस्थानों द्वारा मार्केटिंग का उपयोग करके पारंपरिक विश्वविद्यालयों से प्रतिस्पर्धा करने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाती है। विश्वविद्यालय के नेतृत्व का कहना है कि विज्ञापन खर्च छात्र संख्या में वृद्धि और स्केल की अर्थव्यवस्थाओं के कारण उचित है।
दि प्रिंट की रिपोर्ट इस बात को उजागर करती है कि तीव्र ब्रांडिंग कैसे भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य को बदल सकती है, एक छोटे बी‑स्कूल को देश के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक बना दिया है।