Health
लेफ्ट मेन और एलडी में ब्लॉकेज कि 45 मिनट में सफल हुई एंजियोप्लास्टी
तीनों प्रमुख धमनियों में था ब्लॉकेज लेफ्ट मेन और एलडी जैसी संवेदनशील धमनियों में स्टंट डालकर बचाई जान
बिहटा से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट
लेफ्ट मेन और एलएडी में ब्लॉकेज की चुनौती पर नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज का विजय, मिनट में सफल हुई एंजियोप्लास्टी।
तीनों प्रमुख हृदय धमनियों में था ब्लॉकेज, लेफ्ट मेन और एलएडी जैसी संवेदनशील धमनियों में स्टेंट डालकर बचाई जान
बिहटा :- गोपाल विद्यार्थी । नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बिहटा में चिकित्सकों की टीम ने जटिल हृदय रोग से पीड़ित 72 वर्षीय महिला का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एक 72 वर्षीय महिला को गंभीर हार्ट अटैक की स्थिति में अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज पाया गया। इनमें लेफ्ट मेन और एलएडी जैसी महत्वपूर्ण धमनियां भी शामिल थीं।मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। टेम्पररी पेसमेकर सपोर्ट की मदद से एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग की जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। करीब 45 मिनट तक चली इस प्रक्रिया के बाद मरीज को सीने के दर्द से पूरी राहत मिली।
`अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई और पूरी टीम के बेहतर समन्वय से मरीज को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सका`।
लेफ्ट मेन और एलएडी में ब्लॉकेज की चुनौती पर नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज का विजय, मिनट में सफल हुई एंजियोप्लास्टी।
तीनों प्रमुख हृदय धमनियों में था ब्लॉकेज, लेफ्ट मेन और एलएडी जैसी संवेदनशील धमनियों में स्टेंट डालकर बचाई जान
बिहटा :- गोपाल विद्यार्थी । नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, बिहटा में चिकित्सकों की टीम ने जटिल हृदय रोग से पीड़ित 72 वर्षीय महिला का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। एक 72 वर्षीय महिला को गंभीर हार्ट अटैक की स्थिति में अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज पाया गया। इनमें लेफ्ट मेन और एलएडी जैसी महत्वपूर्ण धमनियां भी शामिल थीं।मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। टेम्पररी पेसमेकर सपोर्ट की मदद से एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग की जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। करीब 45 मिनट तक चली इस प्रक्रिया के बाद मरीज को सीने के दर्द से पूरी राहत मिली।
`अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई और पूरी टीम के बेहतर समन्वय से मरीज को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया जा सका`।