📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Verghese TK
मनोरंजन
कृति सनॉन ने ‘पठान’ व ‘धुरंधर’ जैसी महिला‑मुख्य फिल्मों को समान बजट देने की माँग की
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🗓 30 अक्टू. 2026, 05:17 AM
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अभिनेत्री कृति सनॉन ने ‘पठान’ और ‘धुरंधर’ जैसी सफल फिल्मों के समान बजट महिला‑मुख्य फिल्मों को देने की अपील की।
अभिनेत्री कृति सनॉन ने एबीपी लाइव इंग्लिश को बताया कि भारतीय फिल्म उद्योग को महिला‑मुख्य प्रोजेक्ट्स को कम बजट वाले प्रयोग के रूप में नहीं देखना चाहिए। उन्होंने ‘पठान’ और ‘धुरंधर’ जैसी बड़े बजट वाली पुरुष‑केन्द्रित फिल्मों की व्यावसायिक सफलता को उदाहरण दिया, जिससे महिला‑केंद्री कहानियों को समान वित्तीय समर्थन मिलने की संभावना दिखती है।
सनॉन ने कहा कि प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों और लेखकों की संख्या बढ़ने के बावजूद, अधिकांश महिला‑मुख्य फिल्मों को सीमित बजट मिलते हैं, जिससे उत्पादन मानक, मार्केटिंग और बॉक्स‑ऑफ़िस पर असर पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े बजट से न केवल उत्पादन गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि दर्शकों की विविध कहानियों के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा।
अभिनेत्री ने कहा कि इस तरह के वित्तीय जोखिम उठाना उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए आवश्यक है, और निर्माताओं व स्टूडियो को लैंगिक संतुलित बजट को निवेश के रूप में देखना चाहिए, न कि gamble के रूप में। समान बजट से अधिक महत्वाकांक्षी कहानी कहने की संभावना बनेगी और भारतीय सिनेमा का वैश्विक बाजार भी विस्तृत होगा।
हालांकि इस अपील ने कई उद्योग विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त किया है, कुछ निर्माताओं ने अभी भी सतर्कता जताई है, क्योंकि कुछ महिला‑मुख्य फिल्मों की पिछली कमाई कम रही है। फिर भी कृति की मांग लैंगिक समानता और बजट वितरण पर चल रहे बहस में नई ऊर्जा जोड़ रही है।
सनॉन ने कहा कि प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों और लेखकों की संख्या बढ़ने के बावजूद, अधिकांश महिला‑मुख्य फिल्मों को सीमित बजट मिलते हैं, जिससे उत्पादन मानक, मार्केटिंग और बॉक्स‑ऑफ़िस पर असर पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि बड़े बजट से न केवल उत्पादन गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि दर्शकों की विविध कहानियों के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा।
अभिनेत्री ने कहा कि इस तरह के वित्तीय जोखिम उठाना उद्योग की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए आवश्यक है, और निर्माताओं व स्टूडियो को लैंगिक संतुलित बजट को निवेश के रूप में देखना चाहिए, न कि gamble के रूप में। समान बजट से अधिक महत्वाकांक्षी कहानी कहने की संभावना बनेगी और भारतीय सिनेमा का वैश्विक बाजार भी विस्तृत होगा।
हालांकि इस अपील ने कई उद्योग विशेषज्ञों का समर्थन प्राप्त किया है, कुछ निर्माताओं ने अभी भी सतर्कता जताई है, क्योंकि कुछ महिला‑मुख्य फिल्मों की पिछली कमाई कम रही है। फिर भी कृति की मांग लैंगिक समानता और बजट वितरण पर चल रहे बहस में नई ऊर्जा जोड़ रही है।