📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
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कोलकाता मेट्रो की पर्पल लाइन: TBM ‘डिव्या’ ने विक्टोरिया पर अंतिम टनल ब्रेकथ्रू पूरा किया
✍️ The Hindu
🗓 13 अग. 2026, 10:39 AM
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टनल बोरिंग मशीन ‘डिव्या’ ने कोलकाता के जौका‑एस्प्लेनाइड पर्पल लाइन के खिड़डरपोरे‑विक्टोरिया खंड की दूसरी टनल पूरी कर ली, जिससे विलंबित मेट्रो लाइन के निर्माण को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘डिव्या’ ने कोलकाता के जौका‑एस्प्लेनाइड पर्पल लाइन के खिड़डरपोरे‑विक्टोरिया खंड की दूसरी टनल को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह ब्रेकथ्रू इस खंड के लिए अंतिम टनल पूर्णता को चिह्नित करता है, जो विलंबित मेट्रो लाइन पर काम फिर से शुरू करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
पर्पल लाइन, जो दक्षिण के जौका को उत्तर के एस्प्लेनाइड से जोड़ती है, कई तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण कई बार विलंबित हुई है। अब जब दूसरी टनल समाप्त हो गई है, इंजीनियर अगला चरण शुरू कर सकते हैं, जिसमें लाइनिंग, वेंटिलेशन और स्टेशन निर्माण शामिल हैं।
नगर अधिकारी इस प्रगति का स्वागत करते हैं, यह बताते हुए कि टनल की पूर्णता शेष निर्माण समय को कम करती है और परियोजना को मूल लक्ष्य के करीब लाती है। मेट्रो प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि कार्य बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहेगा।
‘डिव्या’ TBM को खिड़डरपोरे स्टेशन से लॉन्च किया गया था और यह कई महीनों से काम कर रहा है, कोलकाता के जटिल भूमिगत वातावरण को पार करते हुए। इसकी सफल संचालन शहर के बढ़ते ट्रांजिट नेटवर्क में लागू की जा रही उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।
पर्पल लाइन, जो दक्षिण के जौका को उत्तर के एस्प्लेनाइड से जोड़ती है, कई तकनीकी और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण कई बार विलंबित हुई है। अब जब दूसरी टनल समाप्त हो गई है, इंजीनियर अगला चरण शुरू कर सकते हैं, जिसमें लाइनिंग, वेंटिलेशन और स्टेशन निर्माण शामिल हैं।
नगर अधिकारी इस प्रगति का स्वागत करते हैं, यह बताते हुए कि टनल की पूर्णता शेष निर्माण समय को कम करती है और परियोजना को मूल लक्ष्य के करीब लाती है। मेट्रो प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि कार्य बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहेगा।
‘डिव्या’ TBM को खिड़डरपोरे स्टेशन से लॉन्च किया गया था और यह कई महीनों से काम कर रहा है, कोलकाता के जटिल भूमिगत वातावरण को पार करते हुए। इसकी सफल संचालन शहर के बढ़ते ट्रांजिट नेटवर्क में लागू की जा रही उन्नत इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।