📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sankoswal
बिज़नेस
उत्तर प्रदेश के खुरजा की मिट्टी के बर्तनों को ODOP से मिली नई उड़ान, वैश्विक बाजार में
✍️ India Today
🗓 31 अग. 2026, 02:02 PM
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ODOP योजना के तहत खुरजा की पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को अब वैश्विक निर्यात के अवसर मिल रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के खुरजा शहर, जो अपनी शताब्दी पुरानी मिट्टी के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध है, को केंद्र सरकार की एक जिला‑एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत प्रमुखता मिली है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट वस्तु को वित्तीय, तकनीकी और विपणन सहायता प्रदान करके राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाना है।
ODOP की नवीनतम पहल में, राज्य अधिकारियों ने खुरजा हस्तशिल्प विकास बोर्ड के साथ मिलकर किल्न तकनीक को उन्नत किया, आधुनिक डिज़ाइन पेश किए और अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर में भागीदारी सुनिश्चित की। निर्यात‑उन्मुख क्लस्टर स्थापित किए गए हैं और मध्य पूर्व, यूरोप तथा उत्तर अमेरिका के खरीदारों से कई ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
यह कदम स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि का वादा करता है, जिनमें से कई पारिवारिक कार्यशालाओं पर निर्भर हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले वर्ष निर्यात आय में 30‑40% की वृद्धि होगी, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने पर केंद्रित हैं।
उद्योग विशेषज्ञ ODOP को अन्य भारतीय शिल्प क्लस्टरों के लिए मॉडल मानते हैं, यह कहते हुए कि विरासत उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना सतत आजीविका और भारत के सांस्कृतिक ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर सकता है।
ODOP की नवीनतम पहल में, राज्य अधिकारियों ने खुरजा हस्तशिल्प विकास बोर्ड के साथ मिलकर किल्न तकनीक को उन्नत किया, आधुनिक डिज़ाइन पेश किए और अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड फेयर में भागीदारी सुनिश्चित की। निर्यात‑उन्मुख क्लस्टर स्थापित किए गए हैं और मध्य पूर्व, यूरोप तथा उत्तर अमेरिका के खरीदारों से कई ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
यह कदम स्थानीय कारीगरों की आय में वृद्धि का वादा करता है, जिनमें से कई पारिवारिक कार्यशालाओं पर निर्भर हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि अगले वर्ष निर्यात आय में 30‑40% की वृद्धि होगी, जबकि प्रशिक्षण कार्यक्रम पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने पर केंद्रित हैं।
उद्योग विशेषज्ञ ODOP को अन्य भारतीय शिल्प क्लस्टरों के लिए मॉडल मानते हैं, यह कहते हुए कि विरासत उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना सतत आजीविका और भारत के सांस्कृतिक ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर सकता है।