📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Manasvi Arjun
अपराध
खाचरियावास में 1,000 करोड़ की वीएलटीडी घोटाला, आरोप
✍️ The Times of India
🗓 20 अक्टू. 2026, 12:02 AM
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खाचरियावास के निवासियों ने राजस्थान में वीएलटीडी योजना से जुड़े 1,000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है, जिससे जांच की मांग की जा रही है।
राजस्थान के खाचरियावास गांव में स्थानीय लोगों ने वीएलटीडी (Village Level Talent Development) योजना से जुड़े लगभग 1,000 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि विकास हेतु आवंटित धनराशि को नकली परियोजनाओं और अनियमित अनुमोदनों के माध्यम से गबन किया गया।
दावा किया गया है कि इस योजना के तहत स्थानीय प्रतिभा और बुनियादी ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से बड़ी रकम शेल कंपनियों को बिना उचित दस्तावेज़ीकरण के भेजी गई। गांववालों ने जिला प्रशासन से औपचारिक जांच और गबन की गई राशि की वसूली की मांग की है।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, पर राजस्थान पुलिस ने शिकायतों के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली है। जांच में धन के प्रवाह, लाभार्थियों की पहचान और स्थानीय अधिकारियों के साथ संभावित मिलीभगत की जांच की जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह राज्य की ग्रामीण विकास योजनाओं में अब तक के सबसे बड़े वित्तीय अनियमितताओं में से एक हो सकता है, जिससे निधियों की निगरानी और अनुदान वितरण की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
यह मामला भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों और स्थानीय मीडिया की करीबी नजर में है, जिन्होंने सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं में भरोसा बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
दावा किया गया है कि इस योजना के तहत स्थानीय प्रतिभा और बुनियादी ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से बड़ी रकम शेल कंपनियों को बिना उचित दस्तावेज़ीकरण के भेजी गई। गांववालों ने जिला प्रशासन से औपचारिक जांच और गबन की गई राशि की वसूली की मांग की है।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, पर राजस्थान पुलिस ने शिकायतों के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर ली है। जांच में धन के प्रवाह, लाभार्थियों की पहचान और स्थानीय अधिकारियों के साथ संभावित मिलीभगत की जांच की जाएगी।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह राज्य की ग्रामीण विकास योजनाओं में अब तक के सबसे बड़े वित्तीय अनियमितताओं में से एक हो सकता है, जिससे निधियों की निगरानी और अनुदान वितरण की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
यह मामला भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों और स्थानीय मीडिया की करीबी नजर में है, जिन्होंने सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं में भरोसा बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।