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स्वास्थ्य
केरल उच्च न्यायालय ने FMG को राहत दी: भत्ता अधिकार, इंटर्नशिप फीस अवैध
✍️ Medical Dialogues
🗓 03 सित. 2026, 02:48 AM
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केरल उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि विदेशी मेडिकल ग्रैजुएट्स को CRMI भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है और इंटर्नशिप फीस की मांग कानूनी आधार पर नहीं है।
केरल उच्च न्यायालय ने आज एक निर्णय जारी किया जिसमें विदेशी मेडिकल ग्रैजुएट्स (FMG) को CRMI भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है, यह स्पष्ट किया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि FMG पर लगाए गए इंटर्नशिप फीस की मांग का कोई कानूनी आधार नहीं है और इसे लागू नहीं किया जा सकता।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि CRMI भत्ता एक वैधानिक लाभ है, जो केरल में इंटर्नशिप के दौरान FMG को आर्थिक सहायता देने के लिए बनाया गया है। यह फैसला राज्य की अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पेशेवरों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
न्यायालय ने विशेष रूप से यह भी बताया कि FMG से अतिरिक्त इंटर्नशिप फीस लेने का दावा नियमों के विरुद्ध है और किसी भी कानूनी प्रावधान से समर्थित नहीं है।
इस राहत से FMG पर वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है और अधिक अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों को केरल के स्वास्थ्य कार्यबल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय अन्य भारतीय राज्यों में भी इंटर्नशिप फीस नीतियों की समीक्षा का संकेत देता है।
कई चिकित्सा संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, यह तर्क देते हुए कि भत्ता और फीस संरचना को स्पष्ट और कानूनी रूप से लागू किया जाना चाहिए। यह निर्णय अन्य राज्यों में भी समान नीतियों की समीक्षा को प्रेरित कर सकता है।
निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि CRMI भत्ता एक वैधानिक लाभ है, जो केरल में इंटर्नशिप के दौरान FMG को आर्थिक सहायता देने के लिए बनाया गया है। यह फैसला राज्य की अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पेशेवरों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
न्यायालय ने विशेष रूप से यह भी बताया कि FMG से अतिरिक्त इंटर्नशिप फीस लेने का दावा नियमों के विरुद्ध है और किसी भी कानूनी प्रावधान से समर्थित नहीं है।
इस राहत से FMG पर वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है और अधिक अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों को केरल के स्वास्थ्य कार्यबल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। यह निर्णय अन्य भारतीय राज्यों में भी इंटर्नशिप फीस नीतियों की समीक्षा का संकेत देता है।
कई चिकित्सा संघों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, यह तर्क देते हुए कि भत्ता और फीस संरचना को स्पष्ट और कानूनी रूप से लागू किया जाना चाहिए। यह निर्णय अन्य राज्यों में भी समान नीतियों की समीक्षा को प्रेरित कर सकता है।