Religion
कटिहार गुरुद्वारा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ का त्योहार; महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य की कामना
कटिहार गुरुद्वारा में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया करवा चौथ का त्योहार; महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य की कामना
कटिहार शहर के स्थानीय गुरुद्वारा परिसर में सिख समाज की महिलाओं द्वारा करवा चौथ का पावन त्योहार बेहद श्रद्धा, पारंपरिक रीति-रिवाज और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विवाहित महिलाओं ने एकत्रित होकर अपने पतियों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखा और सामूहिक रूप से विशेष पूजा-अर्चना की।
इस धार्मिक व सामाजिक मिलन समारोह में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सज-धजकर हिस्सा लिया। हाथों में रची मेहंदी और पारंपरिक लोक गीतों से पूरा गुरुद्वारा परिसर उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।
सामूहिक कथा और 'करवा फेरने' की रस्म
शाम के समय गुरुद्वारा साहिब के विशेष हॉल में सभी व्रती महिलाओं ने एक घेरा बनाकर करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनी। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ पूजा की थाली और करवे (मिट्टी के पात्र) की अदला-बदली की, जिसे 'करवा फेरना' कहा जाता है। इस रस्म के दौरान उपस्थित वरिष्ठ महिलाओं ने करवा चौथ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला और नवविवाहित महिलाओं को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया। करवा चौथ का यह पावन व्रत न केवल हमारी समृद्ध संस्कृति को जीवंत रखता है, बल्कि आपसी प्रेम, त्याग और पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूत बनाता है। गुरुद्वारा में सामूहिक रूप से इस तरह के आयोजन से समाज में आपसी मेलजोल और एकता की भावना और सुदृढ़ होती है।
इस धार्मिक व सामाजिक मिलन समारोह में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सज-धजकर हिस्सा लिया। हाथों में रची मेहंदी और पारंपरिक लोक गीतों से पूरा गुरुद्वारा परिसर उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।
सामूहिक कथा और 'करवा फेरने' की रस्म
शाम के समय गुरुद्वारा साहिब के विशेष हॉल में सभी व्रती महिलाओं ने एक घेरा बनाकर करवा चौथ की पावन व्रत कथा सुनी। इस दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ पूजा की थाली और करवे (मिट्टी के पात्र) की अदला-बदली की, जिसे 'करवा फेरना' कहा जाता है। इस रस्म के दौरान उपस्थित वरिष्ठ महिलाओं ने करवा चौथ के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला और नवविवाहित महिलाओं को सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया। करवा चौथ का यह पावन व्रत न केवल हमारी समृद्ध संस्कृति को जीवंत रखता है, बल्कि आपसी प्रेम, त्याग और पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूत बनाता है। गुरुद्वारा में सामूहिक रूप से इस तरह के आयोजन से समाज में आपसी मेलजोल और एकता की भावना और सुदृढ़ होती है।