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कृष्ण बल्लभ आश्रम में कांग्रेस ने इंदिरा गांधी एवं वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि एवं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित
31 अक्टूबर 2026 को कृष्ण बल्लभ आश्रम में कांग्रेस के सदस्यों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि और पूर्व उप प्रधानमंत्री वल्लभ भाई पटेल की 191वीं जयंती पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
31 अक्टूबर 2026 को, कृष्ण बल्लभ आश्रम में स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में, कांग्रेस के सदस्यों ने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि और पूर्व उप प्रधानमंत्री वल्लभ भाई पटेल की 191वीं जयंती का स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
उपस्थित कांग्रेस जनों ने उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय यादव, अवधेश कुमार सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी वीरेंद्र सिंह, पूर्व प्रदेश सचिव शशि मोहन सिंह, जिला उपाध्यक्ष सलीम राजा, जिला महामंत्री भोला अंसारी, कैलाशपति देव, रघु जायसवाल, विजय कुमार सिंह, गोविंद राम, मुस्ताक अंसारी, जावेद इकबाल, अर्जुन सिंह, देवधारी मेहता, रंजीत यादव आदि प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने इंदिरा गांधी और वल्लभ भाई पटेल के विचारों पर चलने का संकल्प लिया, और उनके योगदान को याद करते हुए पार्टी के भविष्य के लिए प्रेरणा ली।
कृष्ण बल्लभ आश्रम में यह स्मरणोत्सव स्थानीय कांग्रेस संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहाँ पार्टी के सदस्य अपने पूर्वजों के आदर्शों को पुनः पुष्टि करते हुए पार्टी की दिशा को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहे हैं।
उपस्थित कांग्रेस जनों ने उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष विजय यादव, अवधेश कुमार सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी वीरेंद्र सिंह, पूर्व प्रदेश सचिव शशि मोहन सिंह, जिला उपाध्यक्ष सलीम राजा, जिला महामंत्री भोला अंसारी, कैलाशपति देव, रघु जायसवाल, विजय कुमार सिंह, गोविंद राम, मुस्ताक अंसारी, जावेद इकबाल, अर्जुन सिंह, देवधारी मेहता, रंजीत यादव आदि प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने इंदिरा गांधी और वल्लभ भाई पटेल के विचारों पर चलने का संकल्प लिया, और उनके योगदान को याद करते हुए पार्टी के भविष्य के लिए प्रेरणा ली।
कृष्ण बल्लभ आश्रम में यह स्मरणोत्सव स्थानीय कांग्रेस संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहाँ पार्टी के सदस्य अपने पूर्वजों के आदर्शों को पुनः पुष्टि करते हुए पार्टी की दिशा को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहे हैं।