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काशी कला कस्तूरी ने आठवें स्थापना दिवस पर साहित्यकारों और कलाकारों को किया सम्मानित
सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था काशी कला कस्तूरी ने अपना आठवां स्थापना दिवस समारोह वाराणसी में आयोजित किया, जिसमें साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। बीएचयू कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने संस्था के कार्यों की सराहना की।
वाराणसी। सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था काशी कला कस्तूरी ने शनिवार को रथयात्रा स्थित कन्हैयालाल स्मृति भवन में अपना आठवां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. अवधेश प्रधान को साहित्य सेवा के लिए ‘कस्तूरी रत्न सम्मान-2026’ से नवाजा गया। वहीं, ‘सोच विचार’ पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र को संस्था के पहले लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति और समाज की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने काशी कला कस्तूरी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक विधाएं जीवन में आनंद और संवेदनशीलता लाती हैं। संस्था की ओर से सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्रम, मानपत्र, स्मृति चिह्न और उपहार भेंट किए गए। कला के क्षेत्र में युवा कलाकार अलंकृता रॉय को ‘उदीयमान कलाकार अवार्ड’ तथा युवा क्रिएटर सिद्धार्थ को भी सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता बीएचयू की पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. कमर जहां ने की। उन्होंने युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर 90 वर्षीय लेखक हृदयनाथ श्रीवास्तव की पुस्तक का विमोचन भी हुआ। ‘उदीयमान कलाकार’ सम्मान से सम्मानित अलंकृता रॉय ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया, जिसमें हर्षित उपाध्याय और श्रीकांत मिश्र ने संगत की।
कार्यक्रम में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की पूर्व निदेशक आर्यमा सान्याल, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य चंद्रमौली उपाध्याय, वसंत महिला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. अलका सिंह सहित साहित्य, कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन मुर्तुजा आलम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभास कुमार झा ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृति और समाज की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने काशी कला कस्तूरी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सांस्कृतिक विधाएं जीवन में आनंद और संवेदनशीलता लाती हैं। संस्था की ओर से सम्मानित साहित्यकारों को अंगवस्त्रम, मानपत्र, स्मृति चिह्न और उपहार भेंट किए गए। कला के क्षेत्र में युवा कलाकार अलंकृता रॉय को ‘उदीयमान कलाकार अवार्ड’ तथा युवा क्रिएटर सिद्धार्थ को भी सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता बीएचयू की पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. कमर जहां ने की। उन्होंने युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक मार्गदर्शन की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर 90 वर्षीय लेखक हृदयनाथ श्रीवास्तव की पुस्तक का विमोचन भी हुआ। ‘उदीयमान कलाकार’ सम्मान से सम्मानित अलंकृता रॉय ने अपनी ग़ज़ल प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया, जिसमें हर्षित उपाध्याय और श्रीकांत मिश्र ने संगत की।
कार्यक्रम में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की पूर्व निदेशक आर्यमा सान्याल, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य चंद्रमौली उपाध्याय, वसंत महिला महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. अलका सिंह सहित साहित्य, कला और संस्कृति जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन मुर्तुजा आलम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभास कुमार झा ने प्रस्तुत किया।