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कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पूर्णिया पूर्व में 'गर्ल्स फर्स्ट' सत्र का आयोजन: बालिकाओं के चारित्रिक गुणों और मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गय
'इनलाइट बिहार' (Inlight Bihar) प्रोजेक्ट के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), पूर्णिया पूर्व में एक विशेष भ्रमण एवं सहभागिता सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा 6ठी
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पूर्णिया पूर्व में 'गर्ल्स फर्स्ट' सत्र का आयोजन: बालिकाओं के चारित्रिक गुणों और मानसिक स्वास्थ्य पर दिया गया विशेष जोर !
'इनलाइट बिहार' (Inlight Bihar) प्रोजेक्ट के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), पूर्णिया पूर्व में एक विशेष भ्रमण एवं सहभागिता सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा 6ठी, 7वीं और 8वीं की छात्राओं के साथ 'गर्ल्स फर्स्ट' कार्यक्रम के तहत संवाद स्थापित किया गया। सत्र के दौरान छात्राओं को जीवन में 'चारित्रिक गुणों' (Character Strengths) के महत्व और उनकी व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से समझाया गया। बालिकाओं की समझ का मूल्यांकन करने के लिए दो मित्रों के जीवन पर आधारित एक प्रेरक कहानी और गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने काफी उत्साह और एकाग्रता के साथ भाग लिया। प्रारंभिक संवाद में छात्राओं में कुछ संकोच और झिझक देखी गई, जिसे दूर करने के लिए निरंतर प्रोत्साहन और एक सहज एवं सुरक्षित वातावरण बनाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की वार्डन एवं शिक्षिकाओं के साथ 'मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण' (Mental Health & Emotional Well-Being) विषय पर आगामी सत्र संचालित करने को लेकर रणनीतिक चर्चा हुई। इस दौरान सत्रों की गुणवत्ता और प्रभावी शिक्षण पद्धति (Methodology) पर विचार-विमर्श किया गया। पूरी प्रक्रिया में विद्यालय प्रशासन और शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।
'इनलाइट बिहार' (Inlight Bihar) प्रोजेक्ट के अंतर्गत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), पूर्णिया पूर्व में एक विशेष भ्रमण एवं सहभागिता सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा 6ठी, 7वीं और 8वीं की छात्राओं के साथ 'गर्ल्स फर्स्ट' कार्यक्रम के तहत संवाद स्थापित किया गया। सत्र के दौरान छात्राओं को जीवन में 'चारित्रिक गुणों' (Character Strengths) के महत्व और उनकी व्यावहारिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से समझाया गया। बालिकाओं की समझ का मूल्यांकन करने के लिए दो मित्रों के जीवन पर आधारित एक प्रेरक कहानी और गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने काफी उत्साह और एकाग्रता के साथ भाग लिया। प्रारंभिक संवाद में छात्राओं में कुछ संकोच और झिझक देखी गई, जिसे दूर करने के लिए निरंतर प्रोत्साहन और एक सहज एवं सुरक्षित वातावरण बनाने पर बल दिया गया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की वार्डन एवं शिक्षिकाओं के साथ 'मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण' (Mental Health & Emotional Well-Being) विषय पर आगामी सत्र संचालित करने को लेकर रणनीतिक चर्चा हुई। इस दौरान सत्रों की गुणवत्ता और प्रभावी शिक्षण पद्धति (Methodology) पर विचार-विमर्श किया गया। पूरी प्रक्रिया में विद्यालय प्रशासन और शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।