📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Muhammad Mahdi Karim/ Augustus Binu
राजनीति
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी की शक्ति सीमित की, कांग्रेस विधायक पर भ्रष्टाचार मामला खारिज
✍️ India Today
🗓 08 नव. 2026, 02:33 AM
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी की कार्यक्षमता पर सीमा तय की और कांग्रेस विधायक के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले को खारिज किया।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की वित्तीय अपराधों की जांच में अधिकारों को सीमित करता है। न्यायालय ने एजेंसी के कार्यक्षेत्र को लेकर मौजूदा क़ानूनों की समीक्षा की और कहा कि ईडी को "सुपर कॉप" की तरह असीमित शक्ति नहीं मिलनी चाहिए।
फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम और संबंधित विधियों के दायरे में ही काम करना होगा, और किसी भी प्रकार की अधिकता को असंवैधानिक माना जाएगा। न्यायाधीशों ने व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के साथ वास्तविक मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
इस व्याख्या को लागू करते हुए, कोर्ट ने कांग्रेस के एक विधायक के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले को खारिज कर दिया, यह पाते हुए कि ईडी ने जांच में अपनी सीमा पार कर ली थी। इस निर्णय से विधायक को आरोपों से मुक्त किया गया, जबकि आगे की कानूनी जाँच की संभावना बनी रहती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पूरे भारत में ईडी की भविष्य की कार्रवाइयों को पुनः आकार दे सकता है, जिससे एजेंसियों को जांच शुरू करने से पहले स्पष्ट विधायी दिशा-निर्देशों की आवश्यकता होगी।
फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम और संबंधित विधियों के दायरे में ही काम करना होगा, और किसी भी प्रकार की अधिकता को असंवैधानिक माना जाएगा। न्यायाधीशों ने व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा के साथ वास्तविक मनी लॉन्ड्रिंग मामलों की जांच के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
इस व्याख्या को लागू करते हुए, कोर्ट ने कांग्रेस के एक विधायक के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले को खारिज कर दिया, यह पाते हुए कि ईडी ने जांच में अपनी सीमा पार कर ली थी। इस निर्णय से विधायक को आरोपों से मुक्त किया गया, जबकि आगे की कानूनी जाँच की संभावना बनी रहती है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पूरे भारत में ईडी की भविष्य की कार्रवाइयों को पुनः आकार दे सकता है, जिससे एजेंसियों को जांच शुरू करने से पहले स्पष्ट विधायी दिशा-निर्देशों की आवश्यकता होगी।